aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "rag"
रग रग एक तसव्वुर एक उमंग भरेइक ख़ुशबू फूलों में क्या क्या रंग भरे
अब रग-ओ-जाँ को बचाऊँ तो बचाऊँ कैसेसाँस चलती है तो तलवार लगे है वो भी
रवाँ-दवाँ है रग-ए-संग में लहू की तरहवो ज़िंदगी का तलातुम जो बार बार उठा
लहू की रेंगती रस्सी रगों को जकड़े जाती हैदबी जाती है धड़कन की सदा आहिस्ता-आहिस्ता
लहू रगों का मसाफ़त निचोड़ लेती हैमैं फिर भी ख़ुद को सफ़र-गीर करता रहता हूँ
जो सरायत कर गया 'बेताब' रग रग में तिरीउस की यादों को भुलाने की ये काविश छोड़ दे
रगें सारे बदन की टूटती महसूस होती हैंकुछ इतने ज़ोर से उस का सरापा शोर करता है
रग रग में अब महशर बरपा रहता हैदुख था पहले भी कब थोड़ा कूज़ा-गर
गुर्ग-ओ-समंद ओ मूश-ओ-सग छाँट के एक एक रगफिरते हैं सब अलग अलग रहते हैं एक खाल में
अज़दहा बन के रग-ओ-पै को जकड़ लेता हैइतना आसान नहीं ग़म से रिहा हो जाना
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