aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "scheme"
वो नाला दिल में ख़स के बराबर जगह न पाएजिस नाला से शिगाफ़ पड़े आफ़्ताब में
ये ग़ज़ल अपनी मुझे जी से पसंद आती है आपहै रदीफ़-ए-शेर में 'ग़ालिब' ज़ि-बस तकरार-ए-दोस्त
है तजल्ली तिरी सामान-ए-वजूदज़र्रा बे-परतव-ए-ख़ुर्शेद नहीं
मुकाफ़ात-ए-अमल ख़ुद रास्ता तज्वीज़ करती हैख़ुदा क़ौमों पे अपना फ़ैसला जारी नहीं करता
ऐ चाँद इस में तेरी भी साज़िश ज़रूर हैतारे किधर गए हैं मिरे आसमान के
पार उतरने में भी इक सूरत-ए-ग़र्क़ाबी हैकश्ती-ए-ख़्वाब रह-मौज पे बहना अच्छा
ले चली हैं साहिल पर मुझ को सर-फिरी मौजेंजैसे ये भी तूफ़ाँ की हो कोई नई साज़िश
हमें तबाह किया आब ओ गिल की साज़िश नेकि एक दोस्त हमारा भी आसमान में है
कभी वो शेर-ओ-सुख़न का शैदा कभी वो तहक़ीक़ का दिवानावो मेरी ग़ज़लों का हुस्न-ए-मतला मिरे मक़ाले के बाब जैसा
मुहस्सल नज़्म-ए-'साक़िब' का न पूछोफ़क़त लफ़्ज़ें हैं मतलब कुछ नहीं है
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