aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "tone"
कहा मैं ने बात वो कोठे की मिरे दिल से साफ़ उतर गईतो कहा कि जाने मिरी बला तुम्हें याद हो कि न याद हो
इतना मीठा था वो ग़ुस्से भरा लहजा मत पूछउस ने जिस जिस को भी जाने का कहा बैठ गया
ले तो आए शाइरी बाज़ार में 'राहत' मियाँक्या ज़रूरी है कि लहजे को भी बाज़ारी रखो
अभी कुछ और करिश्मे ग़ज़ल के देखते हैं'फ़राज़' अब ज़रा लहजा बदल के देखते हैं
मिरे गुलू में है इक नग़्मा जिब्राईल-आशोबसंभाल कर जिसे रक्खा है ला-मकाँ के लिए
लहजे की तेज़ धार से ज़ख़्मी किया उसेपैवस्त दिल में लफ़्ज़ की संगीन हम ने की
ज़रा सा क़तरा कहीं आज अगर उभरता हैसमुंदरों ही के लहजे में बात करता है
हम-आहंगी नहीं दुनिया से तेरीतुझे इस पर नदामत है नहीं तो
जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपनातुम्हारा लहजा बता रहा है तुम्हारी दौलत नई नई है
नर्म अल्फ़ाज़ भली बातें मोहज़्ज़ब लहजेपहली बारिश ही में ये रंग उतर जाते हैं
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