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ग़ज़ल
ता-क़यामत शब-ए-फ़ुर्क़त में गुज़र जाएगी उम्र
सात दिन हम पे भी भारी हैं सहर होते तक
मिर्ज़ा ग़ालिब
नज़्म
कभी कभी
गुज़र रहा हूँ कुछ अन-जानी रहगुज़ारों से
मुहीब साए मिरी सम्त बढ़ते आते हैं
साहिर लुधियानवी
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ई-पुस्तक
संत वाणी
संत वाणी
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नज़्म
ताज-महल
सब्त जिस राह में हों सतवत-ए-शाही के निशाँ
उस पे उल्फ़त भरी रूहों का सफ़र क्या मअ'नी
साहिर लुधियानवी
नज़्म
इतना मालूम है!
उस ने हर सम्त मुझे आन के ढूँडा होगा
नाम भूले से जो मेरा कहीं आया होगा
परवीन शाकिर
ग़ज़ल
सिराज औरंगाबादी
ग़ज़ल
उस सम्त वहशी ख़्वाहिशों की ज़द में पैमान-ए-वफ़ा
उस सम्त लहरों की धमक कच्चा घड़ा आवारगी
मोहसिन नक़वी
नज़्म
सब माया है
क्यूँ दर्द के नामे लिखते लिखते रात करो
जिस सात समुंदर पार की नार की बात करो
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
दो इश्क़
वो अक्स-ए-रुख़-ए-यार से लहके हुए अय्याम
वो फूल सी खुलती हुई दीदार की साअ'त



