aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम ",sdnT"
संतोष पुरस्वानी संत
born.1975
शायर
जे. एस. संत सिह संस, दिल्ली
पर्काशक
मकतबा निजामिया हबीबिया, संत कबीर नगर
संत कुमर सिन्हा
लेखक
संत प्रकश संगर
born.1917
Param Sant Satguru Wasmi Shri Ravishankar
संत राम
Param Sant Kripalsingh
सन्त सिंह
Sant Shri Maharaj Swami Hemraj Sahib Chadakashi
संत निरंकारी मंडल, दिल्ली
जे. एस. संत सिंह एंड सन्स, लाहौर
जे. एस. संत सिंह एण्ड सन्स ताजिरान-ए-कुतुब, लाहौर
आफ़िया अकेडमी, संत कबीर नगर
साहिब बन्दगी संत आश्रम, जम्मू
फिर वही छेड़ीं प्यार की बातें आप नहीं बाज़ आएँगेदेखिए हम उठ कर चल देंगे आप नहीं गर जाएँगेक़ौस-ए-क़ुज़ह चूल्हे में जाए काली घटा को आग लगेक्या हम देख नहीं सकते हैं आप हमें दिखलाएँगेआँखें हमारी अच्छी हैं तो आप को इन से क्या मतलबजैसी भी हैं आप अब इन के पीछे ही पड़ जाएँगे?बुरी बुरी नज़रें चेहरे पर डाल रहे हैं उफ़ तौबाहम अपने दोनों गालों को जा के अभी धो आएँगेइतने लम्बे लम्बे ख़त हम कैसे पढ़ें हाए-अल्लाहजब भी आएँगे साथ अपने कोई मुसीबत लाएँगेहम पर आप ने नज़्में लिख दीं इस पे भी हम ख़ामोश रहेनज़्मों के बाद आप तो हम पर नस्र भी अब चिपकाएँगेये झुमके, ये सेंट, ये नज़्में इश्क़ का सब साज़-ओ-सामाँअब वापस ले जाइए साहब बस में नहीं हम आएँगेहम कहते हैं शहर में होंगी नौ सो लड़कियाँ कम-से-कमये क्या ज़िद है प्यार की माला हम ही को पहनाएँगेकर लीजे 'रज़िया' से मोहब्बत हम पर कीजे नज़र-ए-करमवो बे-चारी फँस जाएगी हम उस को समझाएँगेअज़्मत भी अच्छी-ख़ासी है उस से लड़ा लीजे आँखेंआप इस बंदी की ख़ातिर कब तक ज़हमत फ़रमाएँगे'ख़ालिद' साहब आते हैं तो कैसे कहें हम मत आओआते हैं तो हम क्यूँ रोकें खा तो नहीं वो जाएँगेदेखिए हाथ लगाया तो हम डर कर शोर मचा देंगेअम्मी अब्बा फुपफू, ख़ाला दौड़ के सब आ जाएँगेपहले हम को बहन कहा अब फ़िक्र हमीं से शादी कीये भी न सोचा बहन से शादी कर के क्या कहलाएँगे
तेरे 'प्रेम' में पड़ गए जो बचे हैंहुए संत भी हैं यहाँ कैसे कैसे
ख़यालात में सख़्त है इंतिशारतख़य्युल परेशाँ क़लम बे-क़रारजहाँ ख़ून-आलूद-ओ-ख़ूँ-रंग हैवतन पर पड़ा साया-ए-रंज हैगुल-ओ-लाला हैं मुस्तइद बे-तकाँरफ़ीक़ों ने रक्खी हथेली पे जाँहर इक लब पे है बस यही इक सुख़नहसीन और दिलकश है अर्ज़-ए-वतनख़ुलूस आज पामाल है और तबाहउसूल आज दरयूज़ा-ख़्वाह-ए-पनाहगिरफ़्तार-ए-आज़ार दुनिया है आजमोहब्बत परेशान-ओ-रुसवा है आजउसूल-ए-मोहब्बत के हम तर्जुमाँख़ुलूस-ओ-मोहब्बत के हम पासबाँदिवानों को मुतलक़ नहीं है क़रारसदाक़त से बेताब दिल पाएदारहर इक लब पे है बस यही इक सुख़नहसीन और दिलकश है अर्ज़-ए-वतनवतन है ये नानक का फ़रमाँ-पज़ीरथा गौतम इसी कारवाँ का अमीरमोहब्बत ने रुत्बा दिया है बुलंदमोहब्बत ने सब को किया अर्जुमंदहै ग़ैरत का तूफ़ान छाया हुआहै बच्चों में भी जोश आया हुआइरादे हैं सब के बहुत उस्तुवारग़यूर और बेदार हैं जाँ-निसारहर इक लब पे है बस यही इक सुख़नहसीन और दिलकश है अर्ज़-ए-वतनन दी दुश्मनों को कभी इस ने राहहिमाला है रिफ़अत से आलम-पनाहहिमाला की दिलचस्प है दास्ताँये अज़्मत निशाँ सब का है पासबाँज़माने पे ये बात है आश्कारअमा उस की है दुख़्तर-ए-नाम-दारहिमाला की अज़्मत की हम को क़समहिमाला की रिफ़अत की हम को क़समहिफ़ाज़त हिमाला की अब फ़र्ज़ हैहिमाला का हम पर बड़ा क़र्ज़ हैये कहते हैं सब मिल के ख़ुर्द-ओ-कलाँकि ग़ैरत का इस वक़्त है इम्तिहाँहुआ रू-ए-शंकर है ग़ुस्से से लालदिखाएगा अब रक़्स तांडौ जलालइरादे हैं सब के बहुत उस्तुवारग़यूर और बेदार सब जाँ-निसारहर इक लब पे है बस यही इक सुख़नहसीन और दिलकश है अर्ज़-ए-वतनमुहाफ़िज़ हैं हम अम्न के ला-कलामज़माने को देते हैं बुध का पयामसबा अपने गुलशन से जाती है जबमिटाती है दुनिया के रंज-ओ-तअबरसीली है सुब्ह और रसीली है शामनिहाँ इन में है ज़िंदगी का पयामरिवायत का महफ़ूज़ कर के वक़ारहमें लूटना है ख़ुशी की बहारज़रा देखिएगा रफ़ीक़ों की आनहै रक्खी जिन्हों ने हथेली पे जानहर इक लब पे है बस यही इक सुख़नहसीन और दिलकश है अर्ज़-ए-वतनहै इज़्ज़त का जुरअत का अब इम्तिहाँकहीं झुक न जाए वतन का निशाँफ़रेबों से कोई पनपता नहींकभी झूट का मेवा पकता नहींसदाक़त का है बोल-बाला सदानहीं काम आते दरोग़ इफ़्तिराफ़ज़ा है चमन की हमें साज़गारहै पाबंदा-तर इस ज़मीं की बहारहर इक लब पे है बस यहीं इक सुख़नहसीन और दिलकश है अर्ज़-ए-वतनहया और मुरव्वत है जो पुर रहेंहुई हैं वो आँखें बहुत ख़शमगींबढ़े हैं वतन की तरफ़ बद-क़िमाशकलेजा ज़मीं का हुआ पाश पाशपहाड़ों पे है बर्फ़ ग़ुस्से से लालफ़ज़ाएँ हुईं गर्म आतिश मिसालहैं जेहलम में आने को तुग़्यानियाँहर इक मौज पर है ग़ज़ब का समाँमोहब्बत की दुनिया को दिल में लिएबहार-ए-जवानी से पैमाँ किएवतन की हिफ़ाज़त को तय्यार हैंमोहब्बत के बादा से सरशार हैंहिफ़ाज़त है फ़र्ज़ अपने अरमान कीहमें आज पर्वा नहीं जान कीहर इक लब पे है बस यही इक सुख़नहसीन और दिलकश है अर्ज़-ए-वतन2आओ बढ़ो मैदान में शेरों दुश्मन पर यलग़ार करेंक़ब्र बने मैदान में उस की ऐसा उस पर वार करेंज़ंग न लगने पाए अपने भारत की आज़ादी कोआओ ज़ेर-ए-दाम करें सय्यादों की सय्यादी कोलौह-ए-दिल पर नक़्श करो हर हाल में ज़िंदा रहना हैमुल्क की ख़िदमत के रस्ते में जो दुख आए सहना हैये सैलाब-ए-सुर्ख़ नहीं है ज़ुल्म-ओ-सितम की आँधी हैइस सैलाब को रोकेंगे हम हिम्मत हम ने बाँधी हैशेरों की औलाद हो तुम इन वीरों की संतान हो तुममर्द-ए-मुजाहिद मर्द-ए-जरी हो योद्धा हो बलवान हो तुमसाँची मदुरा अमृतसर अजमेर की अज़्मत तुम से हैसुब्ह-ए-बनारस शाम-ए-अवध की अस्ल-ओ-हक़ीक़त तुम से हैताज अजंता और एलोरा के वाहिद फ़नकार हो तुमख़ुश-सीरत ख़ुश-सूरत ख़ुश-मूरत ख़ुश-किरदार हो तुमभीलाई चितरंजन तुम से भाकड़ अनंगल तुम से हैदामोदर की शान है तुम से अज़्मत-ए-चंबल तुम से हैतुम ने बसाए शहर निराले जंगल तुम से मंगल हैंतुम ने निकाली नहरें इतनी सहरा तुम से जल-थल हैंतुम ने इतनी हिम्मत से दरियाओं के रुख़ मोड़ दिएतुम ने खोदीं सुरंगें इतनी दूर के रिश्ते जोड़ दिएतुम कश्मीर की अर्ज़-ए-हसीं के नज़्ज़ारों में पलते होकोहसारों को फाँदते हो तुम दरियाओं पे चलते होतुम मैसूर में वृन्दा-बन के बाग़ सजाने वाले होऊटी शिमला दार्जिलिंग से शहर बसाने वाले होतात्या-टोपे लक्ष्मी-बाई टीपू की औलाद हो तुमजंग के फ़न में क़ाबिल हो तुम माहिर हो उस्ताद हो तुमहिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई जैनी बोध और पारसीदहक़ाँ ताजिर और मुलाज़िम साधू-सन्त और सियासीले के वतन का झंडा आओ दुश्मन पर यलग़ार करेंक़ब्र बने रन-भूम में उस की ऐसा उस पर वार करें
मैं कैसे बताऊँकि जो कैफ़ियत मुझ पे गुज़रीअसातीरी हरगिज़ नहीं थीकिसी देव-माला सेसा गा सेजा तक कहानी सेउस का इलाक़ा नहीं थाकिसी ख़्वाब का ये वक़ूआ नहीं थान ये वाहिमा थाजिसे अक़्ल तश्कील देती हैहैरत का वर्ताहिसार-ए-नफ़स या नज़र का करिश्माकोई वारिदापास अन्फ़ास तन्वीम या मिस्मिरिज़्मकोई हब्स-ए-दमजज़्ब-ओ-मस्तीकिसी संत-साधू की शक्तिकिसी सूफ़ी सालिक का इल्हामसरसामवहशत की लयवज्द या हाल सी कोई शयएक शीशे के अंदर कोई चीज़बुर्राक़ पर्दे पे रक़्साँ सीफ़ानूस-ए-गर्दां सीतस्वीरी हरगिज़ नहीं थीअसातीरी हरगिज़ नहीं थी
Shirin was the daughter of an Armenian king. She was known all over for her fabulous beauty. Khusrau, the king of Persia, fell in love with her. He sent his messenger to Shirin with a proposal of marriage with her. She accepted the proposal but with an extremely difficult condition...
संत वाणी
संतسَن٘ت
साधु, संन्यासी, विरक्त या त्यागी पुरुष, परम धार्मिक और साधु व्यक्ति, ईश्वरभक्त
sentsent
मब'ऊस
साँतسانت
वसंत ऋतु, बसंत, बहार का मौसम, प्रसन्नता
सोंटسونٹ
वह लकड़ी जो कम से कम तीन इंच चौड़ी, चार से पाँच इंच मोटी और आठ से नौ फीट लंबी, आमतौर पर छत के लिए इस्तेमाल की जाती है, कड़ी
Sant Mat Parkash
बाबा सावन सिंह जी
सूफ़ीवाद / रहस्यवाद
Sant Mat Darshan
दास चरन सिंह
Sant Tulsi Das Dohawali
तुलसी दास
दोहा
Sant Samwad
Sant Marg
नेक बच्चों की कहानियाँ
कहानी
शांत रस
शाह मोहम्मद काज़िम कलंदर
कुल्लियात
संत अमृत बानी
शिबर्त लाल
संकलन
Jughrafiya Zila Sant Kabir Nagar
सलमान कबीर नगरी
भूगोल / ज्योग्राफी
Sunnt-e-Nabawi Aur Jadeed Science
तारिक़ महमूद चुग़ताई
विज्ञान
इन से निस्बत रखा करें 'अफ़ज़ल'संत मिलते हैं अब ग़नीमत से
सोच तो ले क्या कहना है क्या सुनना है'संत' अगर मिल जाए दोबारा वो लड़की
Rustam was a celebrated wrestler who was immortalized in the Iranian epic Shahnameh by Firdowsi. It is said that his birth was a particularly difficult one for his mother called Rudaba. As his father worried that she might die due to the size of the baby, he summoned the mythical...
Khizr is known as the spiritual guide of Musa (Moses) and Sikandar (Alexander). While many say that he was a Prophet, some others argue that he was one of the angels sent upon the earth to guide those who had lost their way. There are many stories around him suggesting...
इस में एक उन्वान भोपाल में ग़ालिब के आने की दावत के सिलसिले में भी है। इसी मज़्मून में प्रोफ़ैसर अब्दुल-क़वी दसनवी ने अपनी तहक़ीक़ के मुताबिक़ ये इन्किशाफ़ भी किया है कि नवाब सिकन्दर जहाँ बेगम वक़्तन-फ़वक़्तन अपने मामूँ मियाँ फ़ौजदार मुहम्मद ख़ाँ के ज़रिए ग़ालिब की माली इम्दाद...
Savitri was the only daughter of king Asvapati of Madra Kingdom. She was exceedingly beautiful and the word of her beauty had reached far and wide. When she grew up, her father thought of finding a bridegroom for her. He sent his Brahmins and messengers all around in his kingdom...
Bilqees was the Queen of Saba (also known as Sheba). Her kingdom, situated in Yemen, had its heydays during the 8th century BC. While she is not always mentioned by name but scholars point out that she existed during the time of Prophet Suleiman (Solomon). Although Bilqees was known for...
Ayyub, also known as Job in the Biblical narrative, was a Prophet from the line of Is’haaq (Isaac). According to the Quran (Surah (21), he was deeply devoted to God and was considered to be the most loyal servant of God who stuck to his faith even among adversities. The...
Adam, the first man on this earth, was created out of clay of different shades collected from different regions of the planet earth. God blew His soul into him, endowed him with intellect and taught him the names of things which he repeated after Him. As he was gifted with...
'अगयात' ये जो संत हैं सर्जन से नहीं कमउपदेश की क़ैंची से अना काट रहे हैं
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