aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम ",wIX"
विकास शर्मा राज़
born.1973
शायर
ऑस्कर वाइल्ड
1854 - 1900
लेखक
विकास जोशी वाहिद
born.1965
विकास राना
विकी मालिक
born.2003
डॉ कविता विकास
born.1964
विकास सहज
born.1998
कुमार विकास
विकास शाह मुसाफ़िर
विकास नसीब
born.1982
एलबर्ज पी विनस
विकास दत्त
पर्काशक
सी-वान वीस
आयशा ज़हीरु विच
Acharya Vikas Mesi
एक ज़बरदस्त सैलाब का ज़िक्र दुनिया की तक़रीबन तमाम मज़हबी रिवायतों में मिलता है। ग़ालिबन उनके अव्वलीन माख़ुज़ Gilgamesh गिलगामेश की Myth (जिससे होमर की ओडीसी भी मुतअस्सिर हुई है) और इंजील की रिवायतें हैं जहाँ अहद-नामा-ए-अतीक़ Old Testament की पहली किताब Genesis (VI-IX) में तूफ़ान नूह का ज़िक्र आया...
”ہاں میں بالکل ٹھیک ہوں۔ Vicks ہو تو لگا لیجئے آرام ملے گا۔ میری وجہ سے آپ کی طبیعت خراب ہوئی۔۔۔“ مونا نے افسوس جتایا۔...
मुझ को अक्सर उदास करती हैएक तस्वीर मुस्कुराती हुई
इरादा तो नहीं है ख़ुद-कुशी कामगर मैं ज़िंदगी से ख़ुश नहीं हूँ
एक बरस और बीत गयाकब तक ख़ाक उड़ानी है
vice vice
ऐब
विक़ा' وِقاع
युद्ध, लड़ाई, जंग
विकास وِکاس
अपने आपको प्रकट या व्यक्त करना, फैलना या बढना, बिकास, प्रसार, फैलाव
vis-`a-vis vis-`a-vis
बिलमुक़ाबिल।
इंडिया विन्स फ़्रीडम
रियाज़ुर्रहमान शिरवानी
इतिहास
India Wins Freedom (Azadi-e-Hind)
अबुल कलाम आज़ाद
Saanp Ki Chori
फ़रीमन विलस कराफ़्टस
Sochan vich jahan
बाबा नजमी
शाइरी
Akhran Vich Samander
उर्दू साहित्य के विकास में बिहारी विभूतियो का योगदान
डॉ. विजय कुमार
Lucknow Mahotsav 2006
अननोन ऑथर
सांस्कृतिक इतिहास
Ek Aur Bazgasht
काव्य संग्रह
Tadrees-e-Mutala-e-Qudrat
अनुवाद
इंडिया विन्स फ्रीडम
Jadeed Aljabra-Wa-Musallasat
गणित
Char Jasoos
कहानी
Ghalib Centenary Week Souvenir
Pur Asrar Parcel
नॉवेल / उपन्यास
सच्चा कायदा
सबीहा नसरीन
मुद्दतें हो गईं हिसाब किएक्या पता कितने रह गए हैं हम
कौन तहलील हुआ है मुझ मेंमुंतशिर क्यूँ हैं अनासिर मेरे
मेरी कोशिश तो यही है कि ये मा'सूम रहेऔर दिल है कि समझदार हुआ जाता है
ऐसी प्यास और ऐसा सब्रदरिया पानी पानी है
ये सदा काश उसी ने दी होइस तरह वो ही बुलाता है मुझे
रफ़्ता रफ़्ता क़ुबूल होंगे उसेरौशनी के लिए नए हैं हम
तू भी नाराज़ बहुत है मुझ सेज़िंदगी तुझ से ख़फ़ा हूँ मैं भी
फ़क़त ज़ंजीर बदली जा रही थीमैं समझा था रिहाई हो गई है
कर्ब में क़हक़हे लगाता हूँइतनी वहशत कहाँ से लाता हूँ
मोहब्बत के आदाब सीखो ज़राउसे जान कह कर पुकारा करो
यहाँ तक कर लिया मसरूफ़ ख़ुद कोअकेली हो गई तन्हाई मेरी
देखना चाहता हूँ गुम हो करक्या कोई ढूँड के लाता है मुझे
इश्क़ बीनाई बढ़ा देता हैजाने क्या क्या नज़र आता है मुझे
जिन का सूझा न कुछ जवाब हमेंउन सवालों पे हँस दिए हम लोग
हवा के साथ यारी हो गई हैदिये की उम्र लम्बी हो गई है
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