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नज़्म
शिकवा
मुज़्तरिब-बाग़ के हर ग़ुंचे में है बू-ए-नियाज़
तू ज़रा छेड़ तो दे तिश्ना-ए-मिज़राब है साज़
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
जवाब-ए-शिकवा
देख कर रंग-ए-चमन हो न परेशाँ माली
कौकब-ए-ग़ुंचा से शाख़ें हैं चमकने वाली
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
अल्लामा इक़बाल
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नज़्म
तुलू-ए-इस्लाम
ख़रोश-आमोज़ बुलबुल हो गिरह ग़ुंचे की वा कर दे
कि तू इस गुल्सिताँ के वास्ते बाद-ए-बहारी है
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
कब मेरा नशेमन अहल-ए-चमन गुलशन में गवारा करते हैं
ग़ुंचे अपनी आवाज़ों में बिजली को पुकारा करते हैं
क़मर जलालवी
मर्सिया
क्या अस्ल दर- ओ लअल की वो पानी है ये संग
देखो गुल ओ ग़ुन्चा वो परेशाँ है ये दिल-ए-तंग
मिर्ज़ा सलामत अली दबीर
नज़्म
वालिदा मरहूमा की याद में
है शिकस्त अंजाम ग़ुंचे का सुबू गुलज़ार में
सब्ज़ा ओ गुल भी हैं मजबूर-ए-नमू गुलज़ार में