आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "ملحوظ_خاطر"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "ملحوظ_خاطر"
ग़ज़ल
बुलाने के तरीक़े से बुलाया कीजिए हम को
रहे मल्हूज़-ए-ख़ातिर कम से कम बार-ए-दिगर इतना
सफ़ी औरंगाबादी
ग़ज़ल
थी हमें मल्हूज़-ए-ख़ातिर नेक-नामी इस क़दर
चूम कर नज़रों से उन के बाम-ओ-दर वापस हुए
ज़फ़र मुरादाबादी
समस्त