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नज़्म
जवाब-ए-शिकवा
गर्मी-ए-मेहर की परवरदा हिलाली दुनिया
इश्क़ वाले जिसे कहते हैं बिलाली दुनिया
अल्लामा इक़बाल
लेख
मरदुम-ए-चश्म ज़मीं यानी वो काली दुनिया वो तुम्हारे शोहदा पालने वाली दुनिया...
शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी
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कुल्लियात
डोल लगाए बहुतेरे पर ढब पे कभू नहीं आते तुम
आना यकसू कब देखो हो ईधर आते जाते तुम
मीर तक़ी मीर
लेख
नासिर नज़ीर फ़िराक़ देहलवी
ग़ज़ल
साक़िया हो गर्मी-ए-सोहबत ज़रा बरसात में
क्या ही ठंडी ठंडी चलती है हवा बरसात में