aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "दिलवा"
उसने फिर सोचा, अम्माँ दस्त-पनाह देखते ही दौड़ कर मेरे हाथ से ले लेंगी और कहेंगी। मेरा बेटा अपनी माँ के लिए दस्त-पनाह लाया है, हज़ारों दुआएँ देंगी। फिर उसे पड़ोसियों को दिखाएँगी। सारे गाँव में वाह-वाह मच जाएगी। उन लोगों के खिलौनों पर कौन उन्हें दुआएँ देगा। बुज़ुर्गों की...
दाऊ जी ने मुझे इधर उधर घुमाते और मुख़्तलिफ़ दरख़्तों के नाम फ़ारसी में बताते नहर के उसी पुल पर ले गए जहाँ पहले पहल मेरा उनसे तआरुफ़ हुआ था। अपनी मख़्सूस नशिस्त पर बैठ कर उन्होंने पगड़ी उतार कर गोद में डाल ली सर पर हाथ फेरा और मुझे...
उन दिनों जीवना उसकी देख भाल करती थी। शांता बाई ने मदद के तौर पर उसे चन्द घरों में बर्तन माँझने का काम दिलवा दिया था और गो वो अब बूढ़ी थी और मश्शाक़ी और सफ़ाई से बर्तनों को साफ़ न रख सकती थी फिर भी वो आहिस्ता आहिस्ता रेंग-रेंग...
“नहीं नहीं...” फिर कुछ सोच कर कहा, “मैं ज़रा अच्छे लिबास में तुम से मिलना चाहता हूँ... आज ही एक दोस्त से कह रहा हूँ, वो मुझे सूट दिलवा देगा।” वो हंस पड़ी, “बिल्कुल बच्चे हो तुम... सुनो। जब तुम मुझसे मिलोगे तो मैं तुम्हें एक तोहफ़ा दूंगी।”...
क़रीब था कि वो कोई ख़तरनाक क़दम उठाए कि उसे रियासत पटियाला के एक बड़े अफ़सर मिल गए जो उसके बड़े मेहरबान थे। उसने उनको अपनी हालत-ए-ज़ार अलिफ़ से ले कर या तक कह सुनाई। आदमी रहम दिल था। उसको बड़ी दिक्कतों के बाद लाहौर के एक आरिज़ी दफ़्तर में...
दिलवाدِلوا
get
दिलवा देनाدِلْوا دینا
۔خرید دینا۔ مول لے دینا۔
महेश नाथ के यहाँ अब के भंगन की ख़ूब ख़ातिर की गई। सुब्ह को हरीरा मिलता, दोपहर को पूरियाँ और हलवा। तीसरे पहर को फिर और रात को फिर और गोडर को भी भरपूर परसा मिलता था। भंगन अपने बच्चे को दिन-भर में दोबार से ज़्यादा दूध ना पिला सकती।...
नसीम अख़्तर ने बड़ी बहादुरी दिखाई। आराम आराम से नीचे उतर कर लांड्री की छत तक पहुंच गई। ख़ानसाहब अच्छन ख़ान भी बहिफ़ाज़त तमाम उतर आए। अब वो तवेले में थे। साईस इत्तिफ़ाक़ से तांगे में घोड़ा जोत रहा था। दोनों उसमें बैठे और स्टेशन का रुख़ किया, मगर रास्ते...
मुस्तक़ीम को बहुत ग़ुस्सा आया, मगर पी गया। कुलसूम से बहस करना बिल्कुल फ़ुज़ूल था। एक सिर्फ़ यही हो सकता था कि वो कुलसूम को निकाल कर महमूदा को ले आए, मगर वो ऐसे इक़्दाम के मुतअ’ल्लिक़ सोच ही नहीं सकता था। मुस्तक़ीम की नियत क़तअन नेक थी। उसको ख़ुद...
“अरे भाभी मुझे वैसे ही बुला लिया करो, चला आऊँगा। ये ढोंग काहे को रचाती हो।” रूप चंद जी पर्दे के पीछे से कह रहे थे। “और भाबी आज तो फ़ीस दिलवा दो, देखो तुम्हारे नालायक़ लड़कों को लोनी जंक्शन से पकड़ कर लाया हूँ। भागे जाते थे बदमाश कहीं...
एक फ़िल्म बनाया। दस लाख का मुनाफ़ा हुआ। अब इस रक़म को इधर उधर लुटाने का सवाल पैदा हुआ। चुनांचे उसने अपने हर क़दम में लग़्ज़िश पैदा कर ली। तीन मोटरें ख़रीद लीं। एक नई और दो पुरानी जिनके मुतअ’ल्लिक़ उन्हें अच्छी तरह इल्म था कि बिल्कुल नाकारा हैं। ये...
“उफ़ प्यारी अम्मी और उनकी जान की दुश्मन!” एक दम उनका दिमाग़ क़ुलाँचें भरने लगा। कई दिन से अम्मी उन्हें अजीब-अजीब नज़रों से देखकर नायाब बो बो से कानाफूसी कर रही थीं। नायाब बो बो एक डायन है कम्बख़्त। भाई जान भी गुस्ताख नज़रों से देख देखकर मुस्कुरा रहे थे।...
“तुम से क्यों मिलती है?” “इसलिए कि मैं ज़हीन हूँ, उसके भद्दे चेहरे को ख़ूबसूरत बना कर पेश कर सकता हूँ। इसके लिए क्रास वर्ड पज़ल हल करता हूँ। कभी कभी उसको इनाम भी दिलवा देता हूँ... मंटो, तुम नहीं जानते इन लड़कियों को। मैं ख़ूब पहचानता हूँ इन्हें, जिससे...
मैं उसे अंदर ले गया... डायरेक्टर साहब से मेरे दोस्ताना मरासिम थे। मैंने उससे कहा, “ये ख़ातून हमें रस्ते में पड़ी हुई मिल गई। आपके पास ले आया हूँ, और दरख़ास्त करता हूँ कि उन्हें यहां कोई काम दिलवा दीजिए।” उन्हों ने उसकी आवाज़ का इम्तहान कराया जो काफ़ी इत्मिनान...
अब अहमद दीन पाँच सौ रुपये कहाँ से लाता, उसके पास बमुश्किल बीस या तीस रुपये थे। चुनांचे उसने हेड क्लर्क से कहा,“जनाब! मेरे पास इतने रुपये नहीं, आप मुलाज़मत दिलवा दीजिए तनख़्वाह में से आधी रक़म आप ले लिया करें।”...
जो हुक्म कीजे तो मुर्दे में जान डलवा दूँमैं अहद-ए-पीरी में बीवी जवान दिलवा दूँ
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