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नज़्म
किसान
दश्त के काम-ओ-दहन को दिन की तल्ख़ी से फ़राग़
दूर दरिया के किनारे धुँदले धुँदले से चराग़
जोश मलीहाबादी
नज़्म
हिण्डोला
ख़बर न बुर्द ब-रुस्तम कसे कि सोहरा-बम
न पूछ आलम-ए-काम-ओ-दहन नदीम मिरे
फ़िराक़ गोरखपुरी
समस्त
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ग़ज़ल
रग-ओ-पय में जब उतरे ज़हर-ए-ग़म तब देखिए क्या हो
अभी तो तल्ख़ी-ए-काम-ओ-दहन की आज़माइश है
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
क़ाएदे क्या हमें मालूम नहीं उल्फ़त के
बे-कम-ओ-कास्त मगर उन को पढ़ा सकते नहीं