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ग़ज़ल
होंटों पर आहें क्यूँ होतीं आँखें निस-दिन क्यूँ रोतीं
कोई अगर अपना भी होता ऊँचे ओहदे-दारों में
हबीब जालिब
ग़ज़ल
नज़ीर अकबराबादी
हिंदी ग़ज़ल
पथराई आँखों से निस-दिन मैं बाट निहारूँ प्रीतम की
पाथर से बदरा बह निकले पर बदले नाहीँ भाग सखी
आशु झा 'नक़्क़ाश'
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कहानी
ख़्वाजा अहमद अब्बास
ग़ज़ल
जो दुख पड़ेगा सहा करूँगी जसे कहोगे रहा करूँगी
तुमन कूँ निस दिन दुआ करूँगी सखी सलामत रहो ख़ुदा-या
आबरू शाह मुबारक
ग़ज़ल
मिर्ज़ा दाऊद बेग
नज़्म
हिन्दी
चुन चुन के फूल इस के मालाएँ हम बनाएँ
करके सिंघार इस का निस-दिन इसे सजाएँ
अक़ील सिद्मादीकी माहिर
ग़ज़ल
سونے نہ دیوں خلق کوں شہباز نس دن روئے کر
سونے سنے پر کوں مرے مت کوئی دیکھے سوئے کر
शहबाज़ हुसैनी क़ादरी बीजापुरी
ग़ज़ल
سہنا دیکھیا نس آج کی بیٹھا ہوں شہ کے پاس میں
اے کاش دن نا اوکتا اچتا سو لک ماس میں
सय्यद शाह बुर्हानुद्दीन जानम
ग़ज़ल
'उश्शाक़ कूँ रुख़्सत किया दे पाँ ख़िरद का यार ने
रोता है निस दिन 'मुबतला' घर-बार की सौगंद है