आपकी खोज से संबंधित
परिणाम ".pmai"
अत्यधिक संबंधित परिणाम ".pmai"
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
पुस्तकें के संबंधित परिणाम ".pmai"
अन्य परिणाम ".pmai"
नज़्म
दरख़्त-ए-ज़र्द
गुमाँ ये है तुम्हारी भी रसाई ना-रसाई हो
वो आई हो तुम्हारे पास लेकिन आ न पाई हो
जौन एलिया
ग़ज़ल
कभी जो आवारा-ए-जुनूँ थे वो बस्तियों में फिर आ बसेंगे
बरहना-पाई वही रहेगी मगर नया ख़ार-ज़ार होगा
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
ए'तिराफ़
मुझ से मिलने में अब अंदेशा-ए-रुस्वाई है
मैं ने ख़ुद अपने किए की ये सज़ा पाई है
असरार-उल-हक़ मजाज़
ग़ज़ल
बस-कि रोका मैं ने और सीने में उभरीं पै-ब-पै
मेरी आहें बख़िया-ए-चाक-ए-गरेबाँ हो गईं
मिर्ज़ा ग़ालिब
नज़्म
मस्जिद-ए-क़ुर्तुबा
शौक़ मिरी लय में है शौक़ मिरी नय में है
नग़्मा-ए-अल्लाह-हू मेरे रग-ओ-पय में है
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
तस्वीर-ए-दर्द
मोहब्बत ही से पाई है शिफ़ा बीमार क़ौमों ने
किया है अपने बख़्त-ए-ख़ुफ़्ता को बेदार क़ौमों ने
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
इंक़लाब-ए-पय-ब-पय हर गर्दिश ओ हर दौर में
इस ज़मीन ओ आसमाँ को क्या समझ बैठे थे हम


