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कहानी
प्रेमचंद
ग़ज़ल
राज़-ए-दरून-ए-पर्दा ज़े-रिंदान-ए-मस्त पुर्स
सालिक है क्यूँ हिजाब-ए-शुहूद-ओ-वजूद में
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
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रेख़्ता शब्दकोश
puus
पूस پُوس
विक्रमी संवत् का दसवाँ महीना, फ़सली सन का चौथा महीना जिसमें सर्दी बहुत कठोर होती है, वह चांद्र-मास जो अगहन के बाद पड़ता है, हिन्दुओं के मुताबिक़ साल का नवां महीना जिसमें सर्दी बहुत कठोर होती है, दिसंबर जनवरी का ज़माना जब कि पूरा चांद पुष्य नछत्तर यानी बुरज-ए-सर्तान के तीन सितारों के पास रहता है, पौष माह
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ग़ज़ल
बड़ा किया था पाल-पोस कर फिर भी इक दिन बिछड़ गए
ख़्वाबों को इक बच्चा समझा मैं भी कैसा पागल हूँ
देवमणि पांडेय
ड्रामा
सआदत हसन मंटो
ग़ज़ल
जगदीश प्रकाश
ग़ज़ल
मुझ रू-सियह की है ये दुआ वक़्त-ए-बाज़-पुर्स
रखिएगा अपने लुत्फ़-ओ-करम पर निगाह आप