aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम ".upeo"
अल्लामा इक़बाल ओपन यूनिवर्सिटी, इस्लामाबाद
पर्काशक
करेल चपेक
लेखक
दी ओपेन स्कूल, सिकागो
किस तरह जमा कीजिए अब अपने आप कोकाग़ज़ बिखर रहे हैं पुरानी किताब के
ढूँडता फिरता हूँ मैं 'इक़बाल' अपने आप कोआप ही गोया मुसाफ़िर आप ही मंज़िल हूँ मैं
खुल के मिलने का सलीक़ा आप को आता नहींऔर मेरे पास कोई चोर दरवाज़ा नहीं
बताऊँ आप को मरने के बाद क्या होगापोलाओ खाएँगे अहबाब फ़ातिहा होगा
आप को आता रहा मेरे सताने का ख़यालसुल्ह से अच्छी रही मुझ को लड़ाई आप की
बच्चों के लिए 10 चुनिंदा उर्दू नज़्में
मुस्कुराहट को हम इंसानी चेहरे की एक आम सी हरकत समझ कर आगे बढ़ जाते हैं लेकिन हमारे इन्तिख़ा कर्दा इन अशआर में देखिए कि चेहरे का ये ज़रा सा बनाव किस क़दर मानी-ख़ेज़ी लिए हुए है। इश्क़-ओ-आशिक़ी के बयानिए में इस की कितनी जहतें हैं और कितने रंग हैं। माशूक़ मुस्कुराता है तो आशिक़ उस से किन किन मानी तक पहुँचता है। शायरी का ये इन्तिख़ाब एक हैरत कदे से कम नहीं इस में दाख़िल होइये और लुत्फ़ लीजिए।
हमें अपने रोज़मर्रा के जीवन में किसी न किसी अज़ीज़ और दिल से क़रीब शख़्स का स्वागत करना ही पड़ता है। लेकिन ऐसे समय पर वो सटीक लफ़्ज़ और जुमले नहीं सूझते जो उस के आगमन पर उस के स्वागत में कहे जासकें। अगर आप भी इस परेशानी और उलझन से गुज़रे हैं या गुज़र रहे हैं तो स्वागत पर की जाने वाली शायरी का हमारा ये चयन आपके लिए मददगार होगा।
ape ape
बंदर
अपें اَپیں
رک : اپی (فت ا)
अपे اَپے
self
अपे हो اَپے ہو
اپنی طرف سے.
तौज़ीही ईशरिअ-ए-मेयार देहली
फ़ारूक़ अंसारी
कैटलॉग / सूची
Yaaden Mere Apno Ki
मंज़ूर उस्मानी
R.U.R
Kya Apko Gunahon Se Allergy Hai?
मुख़्तार अहमद इस्लाही अलीग
Haat Uper Kiye
मुज़फ़्फ़र हनफ़ी
Upper Primary Geography
बाबू लक्ष्मण नारायण
आर, एम यू आर
Sooli Uper Sej Piya Ki
कश्मीरी लाल ज़ाकिर
नॉवेल / उपन्यास
Upper Primary General Reader
इंडियन प्रेस लिमिटे़ड, इलाहाबाद
पाठ्य पुस्तक
तजज़ियाती माशियात
वासिफ अली खान
आप को मेरे तआरुफ़ की ज़रूरत क्या हैमैं वही हूँ कि जिसे आप ने चाहा था कभी
हम अपने आप को इक मसअला बना न सकेइसी लिए तो किसी की नज़र में आ न सके
मेहंदी लगाने का जो ख़याल आया आप कोसूखे हुए दरख़्त हिना के हरे हुए
दुनिया न जीत पाओ तो हारो न आप कोथोड़ी बहुत तो ज़ेहन में नाराज़गी रहे
शर्म ग़ैरों से हुआ करती है अपनो से नहींशर्म हम से भी करोगे तो मुसीबत होगी
हाँ आप को देखा था मोहब्बत से हमीं नेजी सारे ज़माने के गुनहगार हमीं थे
अरे-ओ जीते-जी दर्द-ए-जुदाई देने वाले सुनतुझे हम सब्र कर लेते अगर मर के जुदा होता
दावा बहुत बड़ा है रियाज़ी में आप कोतूल-ए-शब-ए-फ़िराक़ को तो नाप दीजिए
आप को देख कर देखता रह गयाक्या कहूँ और कहने को क्या रह गया
हम आप को देखते थे पहलेअब आप की राह देखते हैं
तालाब तो बरसात में हो जाते हैं कम-ज़र्फ़बाहर कभी आपे से समुंदर नहीं होता
कभी-कभी कोई इंतिहाई घटिया आदमी आपको इंतिहाई बढ़िया मश्वरा दे जाता है। मगर आह! कि आप मश्वरे की तरफ़ कम देखते हैं, घटिया आदमी की तरफ़ ज़्यादा।...
इस क़दर नाज़ है क्यूँ आप को यकताई कादूसरा नाम है वो भी मिरी तन्हाई का
हमें अपनी ज़द में ही रहना पड़ेगा ख़ुदी को ख़ुदी में डुबोना पड़ेगान आपे से बाहर तू आना समुंदर समुंदर को समझा रहे हैं किनारे
मैं देखता हूँ आप को हद्द-ए-निगाह तकलेकिन मिरी निगाह का क्या ए'तिबार है
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