aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "Dhalaan"
प्रेम धवन
1923 - 2001
शायर
दख़लन भोपाली
born.1973
बशेशर प्रदीप
born.1925
लेखक
डेविड डालन
ढक्कन रायचूरी
धर्नी धरन संघी
एम एल धवन
ख़ुश दलान पब्लिकेशन्स, बंगलौर
पर्काशक
बिशेशर प्रदीप
उस्ताद दामन अकैड़मी, लाहौर
ख़ुश दलान जोधपुर (राजस्थान)
फिस्ले जो उस जगह तो लुढ़कते चले गएहम को पता नहीं था कि इतनी ढलान है
मिले उरूज तो मग़रूर मत कभी होनाबुलंदियों के सभी रास्ते ढलान से हैं
बधाई तुम को कि पहुँचे तो इस बुलंदी परमगर ये ध्यान भी रखना ढलान बाक़ी है
यहाँ सेढलवान शुरूअ' हो जाती है
धूप में ढलान कमरौशनी में जान कम
ढला ڈَھلا
mould
ढलान ڈَھلان
कोई ऐसा भूखंड जो चपटा और समतल न हो, बल्कि तिरछा हो अर्थात जिसमें नीचे की ओर ढाल हो, ढाल, उतार, झुकाव, झुकावदार, अवरोह, उतराई
धलना دَھلْنا
काँपना, कंपकंपाना, डरना
ढलना ڈَھلْنا
द्रव पदार्थ का नीचे की ओर गिरना या गिराया जाना। जैसे-बोतल की दवा गिलास में ढलना।
Dhalan
हमीद काश्मीरी
नॉवेल / उपन्यास
Dhalan Se Ubharta Sooraj
अरमान शम्सी
अफ़साना
Dhalan Par Ruke Hue Log
ग़यास अकमल
Dhanak Par Qadam
अख़्तर रियाज़ुद्दीन
महिलाओं की रचनाएँ
Daaman-e-Yusuf
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
पत्र
धनक
ग़ुलाम अब्बास
Dhanak Tere Khayal Ki
इक़बाल अशहर
शाइरी
यूसूफ़ नाज़िम
गद्य/नस्र
सुलेमान ख़तीब और उनका कलाम
सय्यद मुबारिज़ुद्दीन रिफ़अत
संकलन
इक़बाल एंड हिज़ इकुअल्स
आलोचना
धमक
अब्दुस्समद
Bachchon Ki Dhanak Rang Duniya
हलीमा फ़िरदौस
कहानी
Jungle Me Dhanak
मुनीर नियाज़ी
Mauritius Mein Dhanak
क़मर अली अब्बासी
सफ़र-नामा / यात्रा-वृतांत
Dhadkan
नज़र जलनवी
काव्य संग्रह
आसमाँ की तरफ़ है उस की नज़रजो भी अब उम्र की ढलान में हैं
रेत पर सब्त हैं ये किस के क़दमहुस्न को नर्म-ख़िरामी की क़सम
शब-ए-फ़िराक़ उतरने लगी ढलान से जबजवान होने लगा दर्द दर्द का क़िस्सा
कभी कहते हैंनदी के किनारे फिसलन भरी ढलान पर
फिर उस के बा'द बदन था न जान जान में थीअजब चढ़ाई मिरी उम्र की ढलान में थी
क़दम सँभाल के रखना हसीन राहों परफिसल गए तो फिर आगे बड़ी ढलान सी है
मुझे तो गहरे समुंदर से जा के मिलना हैअभी मैं रुक नहीं सकता अभी ढलान में हूँ
यक़ीन करने चले तो हो परये रास्ता है ढलान वाला
'उम्र 'दिव्या' ढलान पर थी जब'इश्क़ तुम से हुआ दुबारा था
तक़दीर कब तलक ये रखेगी ढलान मेंतदबीर ले उड़ेगी मुझे आसमान में
न एक बूँद मिरी छत से टपके ऐ मे'मारइस एहतियात से छत की मिरे ढलान निकाल
ढिग ढलान रस्ता विकट सावधान अंजानगाड़ी तेरी काँच की है लोहे का सामान
उछाल यूँ ही नहीं बढ़ गई है लहरों कीनदी का ज़ोर भी है कुछ ढलान में शामिल
ये ज़िंदगी भी अजब राह की मुसाफ़िर हैकहीं चढ़ान बहुत है कहीं ढलान बहुत
नदी को रोक सकी तो ढलान बाँधूँगीमैं अपनी नाव पे ख़ुद बादबान बाँधूँगी
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