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नज़्म
तज्दीद-ए-अमल
काला हो कि गोरा हो ख़ुदा एक है सब का
क़ौमिय्यत-ए-बेजा की रिवायात बदल डाल
फ़ैज़ लुधियानवी
नज़्म
तिजारत
फिर ख़रीदो ब्याह का सामान पहले जान लो
बस तिजारत ही उरूस-ए-क़ौमीयत का राज है
फ़ैज़ लुधियानवी
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ग़ज़ल
आख़िर-ए-शब के हम-सफ़र 'फ़ैज़' न जाने क्या हुए
रह गई किस जगह सबा सुब्ह किधर निकल गई
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ग़ज़ल
'फ़ैज़' दिलों के भाग में है घर भरना भी लुट जाना भी
तुम इस हुस्न के लुत्फ़-ओ-करम पर कितने दिन इतराओगे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ग़ज़ल
'फ़ैज़' उन को है तक़ाज़ा-ए-वफ़ा हम से जिन्हें
आश्ना के नाम से प्यारा है बेगाने का नाम
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ग़ज़ल
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ग़ज़ल
बाद-ए-ख़िज़ाँ का शुक्र करो 'फ़ैज़' जिस के हाथ
नामे किसी बहार-ए-शिमाइल से आए हैं