aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "aadatan"
बदीउज़्ज़माँ ख़ावर
1938 - 1990
शायर
इदारा-ए-अदबियात-ए-उर्दू, हैदराबाद
संपादक
इदारा-ए-फ़रोग़-ए-उर्दू, लाहौर
पर्काशक
मज़हर-उल-ज़मान ख़ान
born.1950
लेखक
मजलिस-ए-इदरात रिसाला साइंस
इदारा-ए-तहक़ीक-ए-मख़तूतात-ए-मशरिक़ी, आन्ध्र प्रदेश
इदारा-ए-सक़ाफ़त-ए-इस्लामिया, लाहौर
इदारा तहक़ीक़ात-ए-इस्लामी, इस्लामाबाद
इदारा-ए-तस्नीफ़-ओ-तालीफ़-ओ-तर्जुमा, कराची
ख्वाजा शब्बीर-उस-ज़माँ
इदारा-ए-अदबियात-ए-अत्फ़ाल, हैदराबाद
इदारा-ए-मआशियात, हैदराबाद
इदारा-ए-अदब जदीद, हैदराबाद
क़मर-उल-ज़माँ
इदारा-ए-शब रंग, अल्लाहबाद
आदतन तुम ने कर दिए वादेआदतन हम ने ए'तिबार किया
आदतन तुम ने कर दिए वा'देआदतन हम ने ए'तिबार किया
लौटना कब है तू ने पर तुझ कोआदतन ही पुकारते रहेंगे
गुज़रे हैं मय-कदे से जो तौबा के ब'अद हमकुछ दूर आदतन भी क़दम डगमगाए हैं
तुम्हारी उँगलियाँ तो आदतन ये जुर्म करती थींचलो छोड़ो
'आदतन عادَۃً
'आदतन عادَتاً
स्वाभाविक रूप से, नियम के अनुसार, आदत के अनुसार
बड़याँ بَڑَیاں
بڑا (رک) کی جمع
नादान نادان
अपरिचित, अज्ञानी, बेख़बर, अंजान, अजनबी, कम समझ-बूझ रखने वाला
फ़न्न-ए-इदारत
मिसकीन हिजाज़ी
उर्दू सहाफ़त तर्जुमा-ओ-इदारत
सय्यद ज़िआउल्लाह
पत्रकारिता
Nafs-e-Rasool (Nida-e-Adalat Insani)
सामाजिक मुद्दे
Mehboob-uz-Zaman Tazkira-e-Shora-e-Dakan
मौलवी अबु तुराब
तज़्किरा / संस्मरण / जीवनी
Ihata-e-Darul Uloom Mein Beete Huye Din
सय्यद मनाज़िर अहसन गीलानी
संस्मरण
Khabar Nawesi Aur Ibtidai Idarat
इमदाद अहमद मियाँ
Aakhiri Dastan Go
जीवनी
Islami Adalat
मुजाहिदुल इस्लाम क़ास्मी
संविधान / आईन
Tarieekh Marsiya : Ibtadai Daur
सय्यद मसूद हसन रिज़वी अदीब
शायरी तन्क़ीद
Tazkira-e-Auliya-e-Ahmedabad
नूर उज़्ज़मा मिस्बाही
शेर-ओ-शायरी
अल्ताफ़ हुसैन हाली
आलोचना
Badee-uz-Zaman Saeed Noorsi
सरवत सौलत
Baghdad Ka Tajir Aur Bachon Ki Adalat
मोहम्मद अहमद ग़ज़न्फ़र
कहानी
रूह-ए-अदब-002
मोहम्मद तुफ़ैल
संकलन
Ghalib Ek Shair, Ek Adakar
अनीस नागी
आ लगा है किनारे सफ़ीना मगरशोर तो आदतन ही मचाते हैं हम
गुज़रे हैं मय-कदे से जो तौबा के बा'द हमकुछ दूर आदतन भी क़दम लड़खड़ाए हैं
मुहीब चुप में आहटों का वाहिमा हवामैं सर से पाँव तक तमाम कान बन गया
उदास बस आदतन हूँ कुछ भी हुआ नहीं हैयक़ीन मानो किसी से कोई गिला नहीं है
आदतन आँख छलक उट्ठी है हँसते हँसतेतू मिरे दोस्त बिला-वज्ह परेशान हुआ
आदतन ही उदास रहता हूँवर्ना किस बात का गिला है मुझे
दिल में कोई ख़ुशी नहीं लेकिनआदतन मुस्कुरा रहा हूँ मैं
मुझे किस से भलाई की अब कोई तवक़्क़ो' नहीं है 'ताबिश'मैं आदतन सब से कह रहा हूँ मुझे दुआओं में याद रखना
आदतन मैं किसी एहसास के पीछे लपकादफ़अ'तन एक ग़ज़ल दश्त-ए-सुख़न से निकली
एक ही मौसम वही मंज़र खटकने लगता हैसच ये है हम आदतन बदलाओ के शौक़ीन हैं
आदतन पूछने लगे हैं लोगक्या कोई हादसा हुआ है यहाँ
मुस्कुराता हूँ आदतन 'असलम'कौन समझे मिरा ग़मीं रहना
आदतन सुलझा रहा था गुत्थियाँ कल रात मैंदिल परेशाँ था बहुत और मसअला कोई न था
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