aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "amarbel"
अमरदीप सिंह
born.1983
शायर
अल्लामा मोहम्मद बिन उमर अल-वाक़दी
लेखक
Ram Amarlal Panjwani
राइट इनरबेल लॉर्डल्टन
अबाबील लखीमपुरी
तेरे क़ामत से भी लिपटी है अमर-बेल कोईमेरी चाहत को भी दुनिया की नज़र खा गई दोस्त
रूह में रेंगती रहती है गुनह की ख़्वाहिशइस अमरबेल को इक दिन कोई दीवार मिले
दीवार पे वा'दों की अमर-बेल चढ़ा दीरुख़्सत के लिए और बहाना ही नहीं था
अमरबेल اَمَربیل
आकाशबेल माम की लत
Amarbel
निशात शाहदवी
काव्य संग्रह
Kitab-ul-Maghazi Urdu
इस्लामियात
Kitab-ul-Maghazi
उम्र-ए-रफ्ता
नक़ी मोहम्मद ख़ान ख़ूरजवी
Sahaba-e-Karam Ke Jangi Maarke
इतिहास
उम्र-ए-राएगाँ
ख़्वाजा अहमद फ़ारूक़ी
आत्मकथा
Tasheel Qasadd-us-Sabeel Maa Panj Risail Mulaqqab Baa Lataaif-e-Sitta
मौलाना अशरफ़ अली थानवी
सूफीवाद दर्शन
Al-Qaul-ul-Jameel Fi Bayani Sawa-is-Sabeel
शाह वलीउल्लाह मोहद्दिस देहलवी
समा और अन्य शब्दावलियाँ
Amarul-aqaqirul-mufrada Wal-adwiyatul-murakkaba
अबुल क़ासिम अल-ज़हरावी
तिब्ब-ए-यूनानी
Ababeel Ki Hijrat
शहीद जमील
अफ़साना
Ababeel
राइडर हैगर्ड
नॉवेल / उपन्यास
ओवेस अहमद दौराँ
Qasad-us-Sabeel Ilal Maulal Jaleel
Umar-e-Khayyam
आसिम
ऐतिहासिक
मुँह धुलाती सवेरे की पहली किरनसाएबाँ पर अमर-बेल महकी हुई
मुझ से लिपटा है अमरबेल के मानिंद कोईमुझ को बे-बर्ग न करता तो समर देता क्या
कोई फल पाएगा क्या तुख़्म-ए-मोहब्बत बो करइस अमर-बेल में तो बर्ग-ओ-समर कुछ भी नहीं
लिपटते हैं रातों को इस तरह मुझ सेअमरबेल पेड़ों की शाख़ों से जैसे
लिपट के रोए अमर-बेल से दर-ओ-दीवारपलट के आए मुसाफ़िर हवेलियाँ न खुलीं
दरख़्त ने अमरबेल को ज़िंदगी दीनुमू बख़्शी
दीवारों पे हरियाली दरख़्तों पे अमरबेलहिज्राँ का हवेली की हर इक शय पे असर है
कपकपी सी मिरे होंटों के नक़रई दाएरों में उतरती गईअमर-बेल की तरह हाथों से रअशा लिपटने लगा
जवान हो गईं सब बूढ़ी आत्माएँ मिरीढकी हुई हैं अमर-बेल से जटाएँ मिरी
वो साफ़-गो है मगर बात का हुनर सीखेबदन हसीं है तो क्या बे-लिबास आएगा
बे-फ़िक्र रहो यारो मैं आज भी हूँ बर्बाददिन फिर गए हैं मेरे अफ़्वाह उड़ी होगी
जिस शख़्स ने उम्र-ए-हिज्र काटीउस शख़्स को एक रात क्या दे
आज यूँ ही सर-ब-सर दिल बहुत उदास हैबात कुछ नहीं मगर दिल बहुत उदास है
गए वो दिन कि कोई ग़म-शनास आएगाजो आ गया भी तो क्या दिल को रास आएगा
نئے ہفتے کا پہلا دن سب سے مشکل تھا۔ دفتر میں چھ افراد پر مشتمل ایک پوری ٹیم اس کی منتظر تھی۔ نئی ڈکشنری کا پروجیکٹ شروع ہو چکا تھا۔ افسر خاتون سے فرمائش کی گئی تھی کہ پہلے وہ نئی ڈکشنری کے ’’اصولیات تالیف‘‘ بتائے۔...
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