आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "ba-arz-e-bisaat-e-vajuud"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "ba-arz-e-bisaat-e-vajuud"
नज़्म
शिकस्त-ए-ज़िंदाँ
तिरे वतन को तिरी अर्ज़-ए-बा-हमीयत को
धड़कते खौलते हिन्दोस्ताँ के दिल का सलाम
साहिर लुधियानवी
ग़ज़ल
बड़े-बड़ों पे भी 'माजिद' ब-नाम-ए-अर्ज़-ए-वतन
जो ए'तिमाद था अल-क़िस्सा मुख़्तसर न रहा
माज़िद सिद्दीक़ी
पृष्ठ के संबंधित परिणाम "ba-arz-e-bisaat-e-vajuud"
अन्य परिणाम "ba-arz-e-bisaat-e-vajuud"
ग़ज़ल
खुली न ज़ुल्फ़ पे कुछ भी मिरी परेशानी
बना हज़ार ज़बाँ अर्ज़मू-ब-मूमू-ब-मू के लिए
मुंशी बनवारी लाल शोला
ग़ज़ल
ब-क़द्र-ए-ज़ौक़-ए-तपिश रुख़्सत-ए-तपिश न मिली
बिसात-ए-आलम-ए-इम्काँ है किस क़दर महदूद
सय्यद वाजिद अली फ़र्रुख़ बनारसी
नज़्म
नए सुर की तमसील
बीसत-ओ-शश-साल दर ख़िदमत फ़न बसर कर्दा अम
ब-चश्म-ए-नम औराक़-ए-तर कर्दा अम
अख़्तर उस्मान
नज़्म
कार-नामा
बिसात-ए-अर्ज़ पे शतरंज खेल सकते हैं
मगर ये फ़न भी मिरी दस्तरस से बाहर था
अख़्तरुल ईमान
ग़ज़ल
बिसात-ए-अर्ज़ पे चाहूँ तो फैल जाऊँ मैं
हो रम्ज़-ए-यार तो दिल में सिमट भी सकता हूँ
नईम जर्रार अहमद
ग़ज़ल
बिसात-ए-इज्ज़ में था एक दिल यक क़तरा ख़ूँ वो भी
सो रहता है ब-अंदाज़-ए-चकीदन सर-निगूँ वो भी
मिर्ज़ा ग़ालिब
शेर
बिसात-ए-इज्ज़ में था एक दिल यक क़तरा ख़ूँ वो भी
सो रहता है ब-अंदाज़-ए-चकीदन सर-निगूँ वो भी