aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "ba-dam"
दरबार आलिया मुर्शिदाबाद शरीफ़, पेशावर
पर्काशक
बी ए डार
लेखक
दम-ब-दम एक साथ बैठे हैंफिर भी कम एक साथ बैठे हैं
अफ़्ज़ूँ जो शबाब दम-ब-दम होता हैघटती है उम्र क्या सितम होता है
अमृत से फ़ज़ाएँ दम-ब-दम धुलती हैंहर ज़र्रे में सौ रौशनियाँ घुलती हैं
दम-ब-दम मुझ पे चला कर तलवारएक पत्थर को जिला दी उस ने
जाने क्या दिल पे दम-ब-दम गुज़रीइक क़यामत क़दम क़दम गुज़री
औरत को मौज़ू बनाने वाली शायरी औरत के हुस्न, उस की सिन्फ़ी ख़ुसूसियात, उस के तईं इख़्तियार किए जाने वाले मर्द असास समाज के रवय्यों और दीगर बहुत से पहलुओं का अहाता करती है। औरत की इस कथा के मुख़्तलिफ़ रंगों को हमारे इस इन्तिख़ाब में देखिए।
दो इन्सानों का बे-ग़रज़ लगाव एक अज़ीम रिश्ते की बुनियाद होता है जिसे दोस्ती कहते हैं। दोस्त का वक़्त पर काम आना, उसे अपना राज़दार बनाना और उसकी अच्छाइयों में भरोसा रखना वह ख़ूबियाँ हैं जिन्हें शायरों ने खुले मन से सराहा और अपनी शायरी का मौज़ू बनाया है। लेकिन कभी-कभी उसकी दग़ाबाज़ियाँ और दिल तोड़ने वाली हरकतें भी शायरी का विषय बनी है। दोस्ती शायरी के ये नमूने तो ऐसी ही कहानी सुनाते है।
नज़्मों का यह संकलन स्वाधीनता दिवस को ध्यान में रख कर बनाया गया है | इसे पढ़ते हुए हम भारतीय इतिहास और संस्कृति से ओत प्रोत हो जाते हैं |
डा ڈا
सितार का एक बोल
दा داء
बीमारी, दुख, मुरक्कबात में जुज़ो-ए-अव़्वल के तौर पर मुस्तामल, मसलन दा-ए-अलासद, दा-ए-अलबोलेना वग़ैरा
दा دا
दरांती, हँसिया, हँसुआ
हम-जा ہَم جا
isotope
Dam Baaz Dam Saaz
इंतिसार हुसैन
Bar Da Raftan Samam Hasan
अननोन ऑथर
Bab Dar Bab
सय्यद महबूब अहमद
Dar Ba Dar
परवीन कुमार अश्क
Be Dar-o-Deewar
सय्यद अहमद शमीम
Hisar Be Dar-o-Deewar
यासमीन हमीद
काव्य संग्रह
Risala-e-Bist Bab Dar Maarifat Astarlab
ख़्वाजा नसीरुद्दीन
ज्योतिष
Risala-e-Bist Bab Dar Maarifat-e-Asturlab
ख्वाजा नसीरुद्दीन तूसी
पाण्डुलिपि
Bam-o-Dar
अलीम उस्मानी
ग़ज़ल
Farhang-e-Iran Dar Bar Khurd Ba Farhangaha-e-Digar
Furqan-e-Khushtar Ba-Jawab-e-Tanqeed
मुंशी हरहर दत्त सिंह खुशतर गोरखपुरी
Dar-o-Bam-e-Takhayyul
फ़र्रुख़ हुमायूँ
शाइरी
Ba-Bazm-e-Noorani Mahfil-e-Sani
मौलवी अब्दुल वाहिद
Barg-o-Baar
बरहम नाथ दत्त
Be Taal Lamhe
प्रेम नाथ दर
अफ़साना
दम-ब-दम तग़य्युर के रंग हैं ज़माने मेंकुछ कमी नहीं आती दर्द के ख़ज़ाने में
अब आँखों में ख़ूँ दम-ब-दम देखते हैंन पूछो जो कुछ रंग हम देखते हैं
सहज ही दम-ब-दम आहिस्ता आहिस्ताबिछड़ जाएँगे हम आहिस्ता आहिस्ता
उठ रहा है दम-ब-दम डर का धुआँकम नहीं हो पा रहा घर का धुआँ
दम-ब-दम टूटती आवाज़ में गाया है मुझेमुतरिब-ए-वक़्त ने बे-सर्फ़ा गँवाया है मुझे
कानों में गूँजती है वो आवाज़ दम-ब-दमइक हाथ रह गया है कहीं हाथ छोड़ कर
ज़ोफ़ से गिर्या मुबद्दल ब-दम-ए-सर्द हुआबावर आया हमें पानी का हवा हो जाना
कुछ इस अदा से कोई दम-ब-दम लुभाए मुझेकि हारने भी न दे और आज़माए मुझे
आती है दम-ब-दम ये सदा जागते रहोजैसे कि जागता है ख़ुदा जागते रहो
दम-ब-दम मेरा तरफ़-दार हुआ करता थाये जो दुश्मन है कभी यार हुआ करता था
हम वो दरख़्त हैं कि जिसे दम-ब-दम अजलअर्रा इधर दिखाती है ऊधर तबर क़ज़ा
फ़रार ख़ुद से मुझे दम-ब-दम जहाँ की तरहमुहीत मुझ पे मिरी ज़ात आसमाँ की तरह
तिरा जल्वा जो दम-ब-दम देखते हैंज़ियादा के धोके में कम देखते हैं
दम-ब-दम उठती हैं किस याद की लहरें दिल मेंदर्द रह रह के ये करवट सी बदलता क्या है
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