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शेर
पल्लव मिश्रा
ग़ज़ल
वो झाँक झाँक के लड़ते हैं मुझ से ये कह कर
जो हम ने वार किया तुम ने क्यूँ बचाई चोट
अहमद हुसैन माइल
ग़ज़ल
पनाहें दे के जिन की ज़िंदगी हम ने बचाई है
कभी उन बाग़ियों पर संग बरसाने भी होते हैं
अहमर जलेसरी
ग़ज़ल
तसद्दुक़ ज़िंदगी फ़ाक़ों पे उस के अहद-ए-हाज़िर में
कि जिस ने जान दे कर आबरू अपनी बचाई है
अब्दुल हफ़ीज़ साहिल क़ादरी
नज़्म
मैं तुम्हारे लिए ले के आया हूँ
दफ़्तर से चुराया हुआ निस्फ़ दिन
दोस्तों से बचाई हुई एक शाम
अंजुम सलीमी
ग़ज़ल
दिल ने अभी बिछाई है जा-ए-नमाज़-ए-इश्क़
लुक्नत-ज़दा ज़बाँ की इक़ामत क़ुबूल कर

