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ग़ज़ल
सारे-जहाँ को दिल से भुलाता रहा हूँ मैं
बस याद तेरी दिल में बसाता रहा हूँ मैं
अर्पित शर्मा अर्पित
शेर
अबस तू घर बसाता है मिरी आँखों में ऐ प्यारे
किसी ने आज तक देखा भी है पानी पे घर ठहरा
मोहम्मद रफ़ी सौदा
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विषय
बहाना
बहाना शायरी
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नज़्म
शाइ'र की दुनिया
गुल-ओ-गुलज़ार के मंज़र वो शे'रों में दिखाता है
वो अपने ही ख़यालों की नई दुनिया बसाता है
नारायण दास पूरी
नज़्म
मैं सहरा-ज़ाद हूँ जानाँ
बगूलों से उलझता हूँ
मैं तपती रेत पर ख़्वाबों की इक दुनिया बसाता हूँ
अफ़ज़ल सफ़ी
ग़ज़ल
कमी कुछ मरने वालों की नहीं ओ क़ातिल-ए-आलम
बसाता जा यूँही आबादी-ए-गोर-ए-ग़रीबाँ को

