आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "bazm-e-azaa-e-dost"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "bazm-e-azaa-e-dost"
ग़ज़ल
बज़्म-ए-अज़ा-ए-दोस्त में ग़म न सही तरब सही
हँस न सको जो खुल के तुम तो ख़ंदा-ए-ज़ेर-ए-लब सही
रशीद रामपुरी
ग़ज़ल
बज़्म-ए-‘अज़ा बनी हुई है बज़्म-ए-ज़ौक़-ओ-शौक़
दौर-ए-नशात मोजिब-ए-दौरान-ए-सर है आज
रशीद शाहजहाँपुरी
पृष्ठ के संबंधित परिणाम "bazm-e-azaa-e-dost"
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
अन्य परिणाम "bazm-e-azaa-e-dost"
ग़ज़ल
ख़ुदा महफ़ूज़ रक्खे दोस्तों से भी कि देखे हैं
लिबास-ए-दोस्ती में कितने मार-ए-आस्तीं मैं ने
बज़्म अंसारी
ग़ज़ल
मैं 'बज़्म' सोज़-ए-तग़ाफ़ुल से जल बुझा लेकिन
उसे न ज़हमत-ए-फ़िक्र-ओ-ख़याल दी मैं ने
बज़्म अंसारी
ग़ज़ल
गुरेज़ 'बज़्म' ज़रूरी है इल्तिफ़ात में भी
हो रस्म-ओ-राह तो हद से कभी बढ़ूँ भी नहीं



