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ग़ज़ल
शाद अज़ीमाबादी
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रेख़्ता शब्दकोश
sabhaa bigaa.De.n tiin jane.n , chugal , chuutiyaa , chor
सभा बिगाड़ें तीन जनें , चुगल , चूतिया , चोर سَبھا بِگاڑیں تِین جَنیں ، چُگَل ، چُوتیا ، چور
चुगु़लखोर, बेवक़ूफ़ और चोर पंचायत की बदनामी का बाइस होते हैं
gadho.n se hal chale.n to bail kaahe ko bisaa.e.n
गधों से हल चलें तो बैल काहे को बिसाएँ گَدھوں سے ہَل چَلیں تو بَیل کاہے کو بِسائیں
अयोग्य व्यक्तियों से यदि काम चले तो योग्य की कौन पूछे
gadho.n se hal chale.n to bail kyuu.n bisaa.e.n
गधों से हल चलें तो बैल क्यूँ बिसाएँ گَدھوں سے ہَل چَلیں تو بَیل کیوں بِسائیں
अगर नादानोन से हुनरमंद वन का काम निकले तो हुनरमंदों को कौन पूछे
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ग़ज़ल
वो बिगड़ना वस्ल की रात का वो न मानना किसी बात का
वो नहीं नहीं की हर आन अदा तुम्हें याद हो कि न याद हो
मोमिन ख़ाँ मोमिन
नज़्म
शिकवा
तुझ से सरकश हुआ कोई तो बिगड़ जाते थे
तेग़ क्या चीज़ है हम तोप से लड़ जाते थे
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
मुज़्तर ख़ैराबादी
ग़ज़ल
क्या सबब तू जो बिगड़ता है 'ज़फ़र' से हर बार
ख़ू तिरी हूर-शमाइल कभी ऐसी तो न थी
बहादुर शाह ज़फ़र
ग़ज़ल
'ज़ौक़' जो मदरसे के बिगड़े हुए हैं मुल्ला
उन को मय-ख़ाने में ले आओ सँवर जाएँगे
शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
ग़ज़ल
यूँ तो आपस में बिगड़ते हैं ख़फ़ा होते हैं
मिलने वाले कहीं उल्फ़त में जुदा होते हैं
मजरूह सुल्तानपुरी
नज़्म
वक़्त
ये ज़ेहन में बनती और बिगड़ती हुई फ़ज़ाएँ
वो फ़िक्र में आए ज़लज़ले हों कि दिल की हलचल
जावेद अख़्तर
शेर
खो दिया तुम को तो हम पूछते फिरते हैं यही
जिस की तक़दीर बिगड़ जाए वो करता क्या है