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नज़्म
ख़्वाब नहीं देखा है
ओस की बूंदों में सूरज के समा जाने का
चाँद सी मिट्टी के ज़र्रों से सदा आने का
वसीम बरेलवी
ग़ज़ल
'फ़ानी' जिस में आँसू क्या दिल के लहू का काल न था
हाए वो आँख अब पानी की दो बूँदों को तरसती है
फ़ानी बदायुनी
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ग़ज़ल
हम भी लै को तेज़ करेंगे बूँदों की बौछार के साथ
पहला सावन झूलने वालो तुम भी पेंग बढ़ा देना
रईस फ़रोग़
नज़्म
बरसात की बहारें
बूंदों की झमझमावट क़तरात की बहारें
हर बात के तमाशे हर घात की बहारें
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
वही नर्म लहजा
कि जैसे फ़ज़ा में बनफ़्शी चमकदार बूंदों के घुंघरू छनकने लगे हों
कि फिर
परवीन शाकिर
ग़ज़ल
दिल में छेद कर ख़ून की बूंदों से हर रेज़ा भरे
टूट कर बन जाएँ बूँदे की कटारी चूड़ियाँ

