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ग़ज़ल
तेरे मिलने की ख़ुशी में कोई नग़्मा छेड़ूँ
या तिरे दर्द-ए-जुदाई का गिला पेश करूँ
साहिर लुधियानवी
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रेख़्ता शब्दकोश
chhe.De.n chalnaa
छेड़ें चलना چھیڑیں چَلْنا
जीवन में उतार चढ़ाव आना, दुख सुख से गुज़रना, आज़माइशों से दो चार होना
naabh-chhedan
नाभ-छेदन نابھ چھیدَن
cutting the umbilical cord
nak chhedan karnaa
नक छेदन करना نَک چھیدَن کَرنا
(आवाम की भाषा) नाक छेदना; (लाक्षणिक) थोड़ी थोड़ी बात पर आपत्ति या शिकायत करना
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ग़ज़ल
तमन्ना है कि छेड़ूँ नग़्मा-ए-इंसानियत लेकिन
'क़तील' अब तक मिरे आ'साब से मज़हब नहीं उतरा
क़तील शिफ़ाई
ग़ज़ल
कभी बे-क़रार हो कर जो मैं साज़-ए-इश्क़ छेड़ूँ
तो ये मुशतरी-ओ-ज़ोहरा कोई गीत फिर न गाएँ
शकील बदायूनी
ग़ज़ल
और को क्या रंज दूँ राहत उठाने के लिए
एक तिनके को न छेड़ूँ आशियाने के लिए
ख़्वाज़ा मोहम्मद वज़ीर
नज़्म
शोला-ए-तरब
'दौराँ' मैं बज़्म-ए-दोस्त में छेड़ूँ न क्यूँ ग़ज़ल
ये ज़मज़मे के दिन हैं लहकने की उम्र है
ओवेस अहमद दौराँ
ग़ज़ल
दिल का अहवाल कि कुछ ज़िक्र-ए-ज़माना छेड़ूँ
बात यूँ छेड़ना अच्छा है कि यूँ अच्छा है
शानुल हक़ हक़्क़ी
हिंदी ग़ज़ल
उस की बंसी से कह दो कि दूजी बस्ती में तान भरे
जब मोहे नहीं छेड़त मोहन मैं क्यूँ कर छेड़ूँ राग सखी
आशु झा 'नक़्क़ाश'
ग़ज़ल
किसी का ज़िक्र छेड़ूँ इस्तिआरों में किनायों में
कोई समझे तो शायद दो घड़ी कोहराम हो जाए


