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ग़ज़ल
गुलों के दाम-ए-मोहब्बत में आ रहा हूँ मैं
फ़रेब हुस्न-ए-मजाज़ी का खा रहा हूँ मैं
बलदेव सिंह हमदम
ग़ज़ल
असीर-ए-दाम-ए-मोहब्बत कहाँ से हो आज़ाद
कि उन की ज़ुल्फ़ की ज़ंजीर जब रिहाई न दे
अहमद मुशर्रफ़ ख़ावर
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नज़्म
सुकून-ए-तन्हाई
तेरे ही दाम-ए-मोहब्बत में गिरफ़्तार रहा
महफ़िल-ए-ग़ैर में उम्मीद-ए-मेहरबाँ भी नहीं
सय्यद जाफ़र अमीर
ग़ज़ल
ऐ तिरे दाम-ए-मोहब्बत के दिल ओ जाँ सदक़े
शुक्र है क़ैद-ए-अलाइक़ से हम आज़ाद रहे
वहशत रज़ा अली कलकत्वी
ग़ज़ल
हसन अब्बास रज़ा
ग़ज़ल
क़फ़स से छुट के भी हम क़ैद हैं दाम-ए-मोहब्बत में
'वसीम' आज़ाद कर के भी वो कब आज़ाद करते हैं
वसीम ख़ैराबादी
ग़ज़ल
ब-ज़ाहिर उस के लबों पर हँसी रही लेकिन
दम-ए-विदाअ' वो दर-पर्दा बे-क़रार भी था
