aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "daruun-e-zaat"
दरून-ए-ज़ात हुजूम-ए-अज़ाब ठहरा हैकहाँ ये सिलसिला-ए-इज़्तिराब ठहरा है
मुझ को दरून-ए-ज़ात का नक़्शा दिखाई देआईना वो दिखाओ कि चेहरा दिखाई दे
दरून-ए-ज़ात का इज़हार करने वाले हैंअजीब लोग हैं हद पार करने वाले हैं
दरून-ए-ज़ात ताबानी नहीं हैकुआँ तो है मगर पानी नहीं है
दरून-ए-ज़ात अज़िय्यत थी और तुम नहीं थेमुझे तुम्हारी ज़रूरत थी और तुम नहीं थे
पास-ए-'इज़्ज़त-दाराँ پاسِ عِزَّتِ داراں
regard of the respectful ones
दरून-ए-ज़ात तिरी दस्तरस में आए बग़ैरहम अपने आप से निकलेंगे सर झुकाए बग़ैर
दरून-ए-ज़ात रौशनी सिमट रही थीदरून-ए-ज़ात एक ज़ख़्म भर रहा था
जितनी ज़ियादा आगही बढ़ती गई मिरीउतना दरून-ए-ज़ात सिमटता चला गया
हमारी बात ज़रूरी नहीं कि सच ही होदरून-ए-ज़ात की तस्वीर हैं निगाहें भी
बाहर अपने ख़ोल से न आ सके तमाम उम्रहम दरून-ए-ज़ात ख़लफ़शार देखते रहे
जिस मंज़िल पर इंकार-ए-दरून-ए-ज़ात-ए-अलमएहसास-ए-बद दूर हो जाएगा
हरीफ़ तो सिपर-अंदाज़ हो चुका कब कादरून-ए-ज़ात मगर महव-ए-जंग सा कुछ है
ख़बर भी है दिल-ए-सर-सब्ज़ तुझ कोदरून-ए-ज़ात बंजर हो गया है
ये हस्त-ओ-बूद ये दौर-ए-जहाँ मुसलसल हैदरून-ए-ज़ात तो बरसों से हम ठहर चुके हैं
जाँ-बलब हूँदरून-ए-ज़ात काला पड़ गया हूँ
हुजूम-ए-साअ'त-ए-ख़ाली न आसमाँ न ज़मींदरून-ए-ज़ात का वो सानेहा था आँखों में
दरून-ए-ज़ात की पेचीदगी कुछ कम नहीं 'अह्मर'ज़माने के लिए हम शा'इरी आसान करते हैं
ब-ज़ाहिर तो गिराई इक इमारतदरून-ए-ज़ात में ढाया गया हूँ
कभी दरून-ए-ज़ात के मंज़र थे इन मेंकंकर ही कंकर हैं अब तालाबों में
लब-ए-ख़मोश पे 'मीना' है नौहा-ए-हिज्राँदरून-ए-ज़ात ये मातम रहा है आँखों में
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