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ग़ज़ल
शोर-ए-दरिया-ए-वफ़ा इशरत-ए-साहिल के क़रीब
रुक गए अपने क़दम आए जो मंज़िल के क़रीब
इफ़्तिख़ार आज़मी
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नज़्म
ताज-महल
ख़याल-ए-हुस्न-ओ-मोहब्बत लिहाज़-ए-अह्द-ए-वफ़ा
दिल-ओ-नज़र को जगाए कि जैसे सेहर किया
दौर आफ़रीदी
ग़ज़ल
जिन को तौक़ीर-ए-रह-ओ-रस्म-ए-वफ़ा याद नहीं
क्या गिला उन से करें जिन को ख़ुदा याद नहीं
अंजुम उसमान
ग़ज़ल
शरह-ए-जाँ-सोज़-ए-ग़म-ए-अर्ज़-ए-वफ़ा क्या करते
तुम भी इक झूटी तसल्ली के सिवा क्या करते
ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ
ग़ज़ल
दिल में मत ढूँड कि ऐ तालिब-ए-ईसार-ओ-वफ़ा
अब ये अल्फ़ाज़ किताबों में नज़र आते हैं


