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ग़ज़ल
दीदा-ए-बे-रंग में ख़ूँ-रंग मंज़र रख दिए
हम ने इस दश्त-ए-तपाँ में भी समुंदर रख दिए
बख़्श लाइलपूरी
ग़ज़ल
उदासी थी कि था इक जल्वा-ए-सद-रंग-ओ-बू शायद
दिल-ए-बे-रंग भी रंगों का शीराज़ा नज़र आया
सय्यद अमीन अशरफ़
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रेख़्ता शब्दकोश
zang-e-kufr aa.iina-e-dil se duur honaa
ज़ंग-ए-कुफ़्र आईना-ए-दिल से दूर होनाزَن٘گِ کُفْر آئِینۂ دِل سے دُور ہونا
ईमान लाना, मुस्लमान होना
aa.iina-e-dil se za.ng-e-kufr duur honaa
आईना-ए-दिल से ज़ंग-ए-कुफ़्र दूर होनाآئینہ دل سے زنگِ کفر دور ہونا
मुसलमान होना, ईमान लाना
ye duniyaa din chaar hai sang na tere jaa, saa.ii.n kaa rakh aasraa aur vaa se hii neh lagaa
ये दुनिया दिन चार है संग न तेरे जा, साईं का रख आसरा और वा से ही नेह लगाیِہ دُنیا دِن چار ہے سَنگ نَہ تیرے جا، سائیں کا رَکھ آسرا اور وا سے ہی نیہہ لگا
ये संसार नश्वर है, ईश्वर से ध्यान लगा
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ग़ज़ल
शरीक-ए-हाल-ए-दिल-ए-बे-क़रार आज भी है
किसी की याद मिरी ग़म-गुसार आज भी है