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ग़ज़ल
किस दिलेरी से करे है तू फ़िदा जान उस पर
दिल-ए-जाँ-बाज़ तिरा हम भी हुनर देखें तो
हसरत अज़ीमाबादी
ग़ज़ल
किस तरह वाक़िफ़ हों हाल-ए-आशिक़-ए-जाँ-बाज़ से
उन को फ़ुर्सत ही नहीं है कारोबार-ए-नाज़ से
ग़ुलाम भीक नैरंग
ग़ज़ल
इक तबस्सुम के तसव्वुर में फ़िदा जान न कर
इतनी ता’जील अभी ओ दिल-ए-जाँ-बाज़ नहीं
बिशन दयाल शाद देहलवी
ग़ज़ल
दिल-ए-जाँ-बाज़ को भी अबरू-ए-क़ातिल है पसंद
जिस तरह मर्द सिपाही को हो तलवार अज़ीज़
मोहम्मद ज़करिय्या ख़ान
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रेख़्ता शब्दकोश
baa-dil-o-jaan
बा-दिल-ओ-जान با دِل و جان
जान-ओ-दिल से, हर तरह पूरी कोशिश के साथ
baa-dil-e-zaar
बा-दिल-ए-ज़ार با دِلِ زار
रोते हुए दिल से, दुखी हृदय से ।।
achhe din paachhe ga.e bar se kiyaa na bet, ab pachhtaa.e kyaa hot jab chi.Diyaa.n chug ga.ii.n khet
अच्छे दिन पाछे गए बर से किया न बेत, अब पछताए क्या होत जब चिड़ियाँ चुग गईं खेत اچھے دِن پاچھے گَئے بر سے کِیا نَہ بیت، اَب پچھتائے کیا ہوت جَب چِڑیاں چُگ گَئِیں کھیت
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शेर
हम में बाक़ी नहीं अब ख़ालिद-ए-जाँ-बाज़ का रंग
दिल पे ग़ालिब है फ़क़त हाफ़िज़-ए-शीराज़ का रंग
अकबर इलाहाबादी
ग़ज़ल
हम जो दिन-रात ये इत्र-ए-दिल-ओ-जाँ खींचते हैं
नफ़अ' कम करते हैं ऐ यार ज़ियाँ खींचते हैं
वाली आसी
ग़ज़ल
मेरी आँखों से गुज़र कर दिल ओ जाँ में आना
जिस्म में ढल के मिरी रूह-ए-रवाँ में आना
अब्दुल अहद साज़
ग़ज़ल
कूचा-हा-ए-दिल-ओ-जाँ की तीरा-शबो आस मरती नहीं
आख़िरी साँस भरते सितारो सुनो आस मरती नहीं
सीमाब ज़फ़र
ग़ज़ल
नूर-ए-ईमाँ सुर्मा-ए-चश्म-ए-दिल-ओ-जाँ कीजिए
पर्दा-दार-ए-हुस्न-ए-यकता चश्म-ए-हैराँ कीजिए
साहिर देहल्वी
ग़ज़ल
नक़्द-ए-दिल-ओ-जाँ उस की ख़ातिर रहन-ए-जाम करो
'मीर' के बादा-ए-ग़म-ख़ुर्दा को मय-ख़्वारों में आम करो
शाहिद इश्क़ी
ग़ज़ल
तक़ाज़ा-ए-दिल-ओ-जाँ का कहीं दरमाँ नहीं मिलता
दयार-ए-दर्द में तस्कीन का सामाँ नहीं मिलता
अब्दुल अज़ीज़ ख़ालिद
ग़ज़ल
जनाज़ा धूम से उस आशिक़-ए-जाँ-बाज़ का निकले
तमाशे को अजब क्या वो बुत-ए-दम-बाज़ आ निकले

