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हिंदी ग़ज़ल
ये सारा जिस्म झुक कर बोझ से दोहरा हुआ होगा
मैं सज्दे में नहीं था आप को धोका हुआ होगा
दुष्यंत कुमार
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ग़ज़ल
शर्म से दोहरा हो जाएगा कान पड़ा वो बुंदा भी
बाद-ए-सबा के लहजे में इक बात में ऐसी पूछूँगा
अमजद इस्लाम अमजद
ग़ज़ल
आनंद नारायण मुल्ला
ग़ज़ल
वो आज फिर यही दोहरा के चल दिया 'बानी'
मैं भूल के नहीं अब तुझ से बोलने वाला
राजेन्द्र मनचंदा बानी
ग़ज़ल
ज़रा मुश्किल से समझेंगे हमारे तर्जुमाँ हम को
अभी दोहरा रही है ख़ुद हमारी दास्ताँ हम को
अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा
नज़्म
गुमाँ का मुमकिन- जो तू है मैं हूँ
हमें यक़ीं है जवाब हम हैं
यक़ीं को कैसे यक़ीं से दोहरा रहे हैं कैसे!
नून मीम राशिद
नज़्म
बदनाम हो रहा हूँ
तब रास्ते में बाहम वो मेरी दास्ताँ को
दोहरा के छेड़ती हैं सलमा को मेरी जाँ को
अख़्तर शीरानी
नज़्म
आज की दुनिया
दुनिया को इंक़लाब की याद आ रही है आज
तारीख़ अपने आप को दोहरा रही है आज

