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ग़ज़ल
गर्मी-ए-सोज़-ए-जिगर बेताब कर देती है जब
ठंडी साँसें ऐसी भरता हूँ कि आ जाती है नींद
ख़्वाज़ा मोहम्मद वज़ीर
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ग़ज़ल
राह-ए-सितम में सोज़-ए-जिगर कैसे छोड़ दें
लम्बा सफ़र है ज़ाद-ए-सफ़र कैसे छोड़ दें
इरफ़ान सिद्दीक़ी
ग़ज़ल
किसी दिन तो हमारा दर्द-ए-दिल सोज़-ए-जिगर देखो
कभी तो भूल कर आओ कभी तो पूछ कर देखो
सफ़ी औरंगाबादी
ग़ज़ल
क्या मेरा बस है ज़ब्त जो सोज़-ए-जिगर न हो
ओ सर्द-मेहर आग मिरी बात पर न हो
मुंशी बनवारी लाल शोला
ग़ज़ल
दर्द-ए-दिल कैफ़-ए-अलम सोज़-ए-जिगर से पहले
ज़िंदगी कुछ भी न थी तेरी नज़र से पहले
अज़मत अब्दुल क़य्यूम ख़ाँ
नज़्म
मर्ग-ए-सोज़-ए-मोहब्बत
आओ कि मर्ग-ए-सोज़-ए-मोहब्बत मनाएँ हम
आओ कि हुस्न-ए-माह से दिल को जलाएँ हम



