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ग़ज़ल
दोस्तो हाल-ए-दिल-ए-ज़ार ज़रा उस से कहो
कम न हो इस में ज़रा बल्कि सिवा उस से कहो
किशन कुमार वक़ार
ग़ज़ल
उस ने हाल-ए-दिल-ए-नाशाद न देखा न सुना
ऐसा ज़ालिम सितम-ईजाद न देखा न सुना
फ़हीमुद्दीन अहमद फ़हीम
शेर
हाल-ए-दिल लिखते न लोगों की ज़बाँ में पड़ते
वज्ह-ए-अंगुश्त-नुमाई ये क़लम है हम को
दत्तात्रिया कैफ़ी
ग़ज़ल
क़ाबिल-ए-शरह मिरा हाल-ए-दिल-ए-ज़ार न था
सुनने वाले तो बहुत थे कोई ग़म-ख़्वार न था


