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नज़्म
गुफ़्तनी-ओ-ना-गुफ़्तनी
माथे पे फ़र्श-ए-बोस-ए-रिवायात का ग़ुबार
चेहरा ब-फ़ैज़-ए-हल्क़ा-ए-उश्शाक़ अगरई
शोरिश काश्मीरी
नज़्म
क्या गुल-बदनी है
मेहंदी की सजावट कि हथेली पे गुलिस्ताँ
या हल्क़ा-ए-उश्शाक़ में है चेहरा-ए-ताबाँ
जोश मलीहाबादी
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ग़ज़ल
ज़माना क़िस्सा-ए-दार-ओ-रसन को भूल न जाए
किसी के हल्क़ा-ए-गेसू में वो कशिश ही नहीं
आल-ए-अहमद सुरूर
ग़ज़ल
दाम-ए-हर-मौज में है हल्क़ा-ए-सद-काम-ए-नहंग
देखें क्या गुज़रे है क़तरे पे गुहर होते तक
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
लश्कर-ए-क़ल्ब-ए-सफ़-ए-उश्शाक़ में है ग़लग़ला
यक्का-ताज़-ए-आह कूँ किस ने किया है ना-रसीद
सिराज औरंगाबादी
शेर
दाम-ए-हर-मौज में है हल्क़ा-ए-सद-काम-ए-नहंग
देखें क्या गुज़रे है क़तरे पे गुहर होते तक
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
बुल-हवस जामा-ए-उर्यानी-ए-उश्शाक़ को देख
तू गरेबान से क्यूँ अपना गला बाँधे है