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नज़्म
अलविदा
लड़कपन की रफ़ीक़ ऐ हम-नवा-ए-नग़मा-ए-तिफ़ली
हमारी ग्यारह साला ज़िंदगी की दिल-नशीं वादी
अब्दुल अहद साज़
ग़ज़ल
ख़लील फ़रहत करंजवी
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ग़ज़ल
'फ़िराक़'-ए-हम-नवा-ए-'मीर'-ओ-'ग़ालिब' अब नए नग़्मे
वो बज़्म-ए-ज़िंदगी बदली वो रंग-ए-शाइ'री बदला
फ़िराक़ गोरखपुरी
नज़्म
मुकाफ़ात
इसे न होने दिया मैं ने हम-नवा-ए-शबाब
न इस पे चलने दिया शौक़ का फ़ुसूँ मैं ने
नून मीम राशिद
ग़ज़ल
हक़ीक़त-आश्ना रंग-ए-रुख़-ए-बातिल नहीं होता
कि ग़ुंचा टूट कर भी हम-नवा-ए-दिल नहीं होता
फ़ैज़ झंझानवी
ग़ज़ल
वो असीर-ए-गेसू-ए-यार थे वो जो हम-नवा-ए-बहार थे
कहीं और हो के गुज़र गए वही बाब-ए-‘इश्क़ में आए कब
सुहैल आज़ाद
ग़ज़ल
नातिक़ गुलावठी
ग़ज़ल
समझ के उस को भी ग़म-ख़्वार-ओ-हम-नवा 'रिज़वाँ'
हदीस-ए-दिल किसी दिलबर के रू-ब-रू की थी
रिज़्वानुल्लाह
ग़ज़ल
ज़िंदा हो रस्म-ए-जुनूँ किस की नवा-रेज़ी से
अब रहा कौन यहाँ शो'ला-ब-जाँ हम-नफ़सो
बद्र-ए-आलम ख़लिश
ग़ज़ल
फ़र्दंग-ओ-चंग-ओ-नय दफ़ बीन-ओ-रुबाब-ओ-सुरनी
हम-साज़-ओ-हम-नवा हैं लेते हैं तान आठों