aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "hud-hud"
सर्वरूल हुदा
born.1971
लेखक
अबुल हुदा
क़मरुल हुदा फ़रीदी
मोहम्मद नुरुल हुदा नूर
born.1995
कमरुल हुदा फरीदी
नूरुल हुदा
नूरुल हुदा नूर ज़बीही बनारसी
born.1934
शायर
मिफ़्ताहुल हुदा
संपादक
ख़लीलुल हुदा शारिक नियाज़ी
1917 - 1978
वरेन्या क्रिएशन्स, हैदराबाद
पर्काशक
एच. आर. डी. जयपुर
क़मरुल हुदा फ़िरदौसी
ख़लीलुल-हुदा
मिसबाहुल-हुदा
नूरुल हुदा सय्यद
आख़िर प्रोग्राम बन ही गया। जून का पहला हफ़्ता था। हमलोग दिल्ली जाने की तैयारियाँ करने लगे। हम सात आदमियों की टोली में मसख़रा रमेश भी था, जिसको हमने बड़ी मुश्किल से इस सफ़र के लिए तैयार किया था, क्योंकि हम जानते थे कि इसके बग़ैर सफ़र का लुत्फ़ आधा...
ख़ुश-आवाज़ पपीहा देखोहुद-हुद और गौरय्या देखो
कहा नाई ने अच्छा यक न दो शुदबस अब उड़ जाओ तुम भी बेटे हुद-हुद
पोरों पोरों ज़ख़्म हुई हूँख़्वाबों की सीढ़ी से गिरी हूँ
भूला-बिसरा ख़्वाब हुए हमकुछ ऐसे नायाब हुए हम
शेर-ओ-अदब के समाजी सरोकार भी वाज़ेह रहे हैं और शायरों ने इब्तिदा ही से अपने आप पास के मसाएल को शायरी का हिस्सा बनाया है अल-बत्ता एक दौर ऐसा आया जब शायरी को समाजी इन्क़िलाब के एक ज़रिये के तौर पर इख़्तियार किया गया और समाज के निचले, गिरे पड़े और किसान तबक़े के मसाएल का इज़हार शायरी का बुनियादी मौज़ू बन गया। आप इन शेरों में देखेंगे कि किसान तबक़ा ज़िंदगी करने के अमल में किस कर्ब और दुख से गुज़र्ता है और उस की समाजी हैसियत क्या है।किसानों पर की जाने वाली शायरी की और भी कई जहतें है। हमारा ये इन्तिख़ाब पढ़िए।
फ़िल्म और अदब में हमेशा से एक गहरा तअल्लुक़ रहा है ,अगर बात हिन्दुस्तानी फ़िल्मों की हो तो उनमें इस्तिमाल होने वाली ज़बान, डायलॉगज़ , स्क्रीन राईटिंग और नग़मो में उर्दू का हमेशा से बोल-बाला रहा है जो अब तक जारी है। आज इस कलेक्शन में हमने राजा मेहदी ख़ान के कुछ मशहूर नग़्मों को शामिल किया है । पढ़िए और क्लासिकल गानों का लुत्फ़ लीजिए।
नुसरत फ़तेह अली ख़ान ने बेशुमार कव्वालियाँ और ग़ज़लें गाई हैं ,और ग़ज़ल गायकी हो या क़व्वाली दोनों में अपनी आवाज़ और हुनर से लोगों का दिल जीता है। इस इंतिख़ाब में कुछ ऐसी ग़ज़लें पेश की जा रही हैं जिन्हें नुसरत साहब की आवाज़ ने ज़िंदा कर दिया है। पढ़िए और लुत्फ़ लीजिए।
हुद-हुदحد حد
The hoopoe;—the lapwing, pewit
हुड बीती
रतन सिन्ह
नज़्म
Robin Hood
शब्बीर हकीम
Robin Hud Ke Karname
राबिन हुड
Hayat Robin Hud
अननोन ऑथर
रॉबिन हुड
हुमायूँ इक़बाल
जासूसी
Main Kaun Hoon
सईदा अफ़ज़ाल
आत्मकथा
Rat Ke Jage Hue
जमाल एहसानी
Bul Hoos
Hum Urdu Kaise Padhayein
मोईनुद्दीन
Kitab-ul-Huda
याक़ूब हसन
Aankh Ansu Hui
वसीम बरेलवी
काव्य संग्रह
Middle Class Ka Jugrafiya-Hyd
Khoya Hua Ufuq
मोहम्मद ख़ालिद अख़्तर
हुन की करिए
सय्यद मंज़ूर हैदर
दुख का मंतर पढ़ी हुई हूँमैं ग़ुर्बत में बड़ी हुई हूँ
सोच लीजे क्यों 'अज़ाब आया था क़ौम-ए-हूद परऔर फिर कुछ ग़ौर कीजे लम्हा-ए-मौजूद पर
हम हुए तुम हुए कि 'मीर' हुएउस की ज़ुल्फ़ों के सब असीर हुए
मैं भी बिखरा हुआ हूँ अपनों मेंवो भी तन्हा सा अपने घर में है
ब-ज़ाहिर है हँसी होंटों पे मेरेमगर अंदर से मैं टूटा हुआ हूँ
हैं अब इस फ़िक्र में डूबे हुए हमउसे कैसे लगे रोते हुए हम
दूरी हुई तो उस के क़रीं और हम हुएये कैसे फ़ासले थे जो बढ़ने से कम हुए
जाने ऐ दोस्त क्या हुआ हम कोतेरा ग़म भी न अब रहा हम को
हज़ार दर्द समेटे हुए हूँ इक दिल मेंबिखर गई जो मिरी दास्ताँ तो क्या होगा
सफ़र के तसव्वुर से सहमा हुआ हूँबड़ी देर से यूँ ही ठहरा हुआ हूँ
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