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jaan-e-jahaa.n
जान-ए-जहाँ جانِ جَہاں
सारे संसार वासियों का प्राण, विश्वजीवन अर्थात नायिका, अर्थात: ईश्वर
jaan-e-jaanaa.n
जान-ए-जानाँ جانِ جاناں
प्राणाधार, प्राणों का प्राण अर्थात प्रेमिका, बहुत प्यारा माशूक़
aa.o to jaa.o kahaa.n
आओ तो जाओ कहाँ آؤ تو جاؤ کہاں
क्रोध की तीव्रता स्पष्ट करने के लिए कहते हैं
aa.e to jaa.e kahaa.n
आए तो जाए कहाँ آئے تو جائے کہاں
अत्यधिक क्रोध में भर गया, ऐसा उलझा कि जान छुड़ाने में कठिनाई हो गई
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नज़्म
याद
इस क़दर प्यार से ऐ जान-ए-जहाँ रक्खा है
दिल के रुख़्सार पे इस वक़्त तिरी याद ने हात
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ग़ज़ल
गरचे दिल में ही सदा जान-ए-जहाँ रहते हो
पर ब-ज़ाहिर नहीं मालूम कहाँ रहते हो
सैय्यद मोहम्मद मीर असर
ग़ज़ल
किया है तू ने तो जान-ए-जहाँ जहाँ तस्ख़ीर
हुआ है हुस्न का शोहरा तिरा तो आलम-गीर
मिर्ज़ा ज़हीरुद्दीन अज़फ़री
ग़ज़ल
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ग़ज़ल
बर्क़-रफ़्तार वो यूँ जान-ए-जहाँ मिलते हैं
हम जहाँ होते हैं वो हम को वहाँ मिलते हैं
अज़ीज़ मुरादाबादी
ग़ज़ल
ग़म-ए-हिज्राँ से ऐ जान-ए-जहाँ हम बन-सँवर निकले
सितम तेरी जुदाई के सभी ही बे-असर निकले
इरफ़ान ग़ाज़ी
ग़ज़ल
मीर सय्यद मुज़फ्फर अली ज़फ़र मुज़ाहरी
ग़ज़ल
कोई आज़ुर्दा करता है सजन अपने को हे ज़ालिम
कि दौलत-ख़्वाह अपना 'मज़हर' अपना 'जान-ए-जाँ' अपना
मज़हर मिर्ज़ा जान-ए-जानाँ
ग़ज़ल
मर्कज़-ए-दीदा-ए-ख़ुबान-ए-जहाँ हैं भी तो क्या
एक निस्बत भी तो रखते हैं तिरी ज़ात से हम


