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ग़ज़ल
फेंकना तुम सोच कर लफ़्ज़ों का ये कड़वा गुलाल
फैल जाता है कभी सदियों पे भी इक पल का रंग
क़तील शिफ़ाई
नज़्म
होली
ये टाँग घसीटे है तो वो खींचे पकड़ बाल
वो हाथ मरोड़े तो ये तोड़े है खड़ा गाल
नज़ीर अकबराबादी
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रेख़्ता शब्दकोश
kha.Dnaa
खड़ना کَھڑْنا
رُکنا، ٹھہرنا.
kha.Daa
खड़ा کَھڑا
(जीव या पशु पक्षी) जो अपने पैरों के सहारे शरीर सीधा करके ऊपर उठा हो। जो झुका, बैठा या लेटा न हो। जैसे-नौकर सामने खड़ा था। पद-खड़े खड़े इतनी जल्दी की बैठने तक का अवकाश न हो। जैसे-वे आये और खड़े-खडे अपना काम निकालकर चल दिये। खड़ी सवारी = किसी के आने-जाने के संबंध में, आदर या व्यंग्य के लिए, चटपट, तुरन्त। जैसे-खड़ी सवारी आई और चली गई।
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नज़्म
दिल बहलता नहीं किसी सूरत
मुँह जो कड़वा था वो रहा कड़वा
हम ने लड्डू भी खा के देख लिया
मिर्ज़ा अदीब
नज़्म
चाँद
अम्मी मेरा चाँद तो देखो बालू-शाही जैसा है
निकहत बाजी का है कैसा कड़वा और कसीला चाँद


