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ग़ज़ल
हाए मत पूछो मरीज़-ए-ग़म की कैफ़ीयात-ए-कर्ब
नींद क्या ग़फ़लत सी हो जाती ही पिछली रात को
तालिब बाग़पती
ग़ज़ल
पोशीदा लफ़्ज़ लफ़्ज़ में है दास्तान-ए-कर्ब
'क़ुदसी' किताब-ए-ज़ीस्त का हर बाब देखना
औलाद-ए-रसूल क़ुद्सी
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ग़ज़ल
वो चाँदी के पानी से धुले आरिज़-ओ-रुख़ पर
कैफ़िय्यत-ए-सद-रंग-ए-हिना याद है अब तक
सज्जाद बाक़र रिज़वी
ग़ज़ल
अब कोई किस से कहे कैफ़िय्यत-ए-ज़ख़्म-ए-बहार
सब्ज़ा बेगाना है गुल चुप हैं सबा आवारा
अख़्तर होशियारपुरी
ग़ज़ल
है हवा-ए-ख़ुश-बयाँ कैफ़िय्यत-ए-अब्र-ए-बहार
और हैं औराक़-ए-गुल मज़मून-ए-ज़र बाँधे हुए
सरमद सहबाई
ग़ज़ल
कैफ़ियात-ए-सज्दा-ए-ज़ौक़-ए-मोहब्बत अल-अमाँ
का'बा-ए-दिल बे-नियाज़-ए-कुफ़्र-ओ-ईमाँ हाए हाए
बासित भोपाली
ग़ज़ल
ग़र्क़-ए-कैफ़ियत-ए-आहंग-ए-तरब सुन तो सही
ज़िंदगी दर्द में डूबी हुई आवाज़ भी है