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शेर
है कारवान-ए-क़ुदसी-ए-हर्फ़-ए-अज़ल रवाँ
हर जेहल-ओ-ज़ुल्म-ओ-ज़ुल्मत-ओ-ज़ेर-ओ-ज़बर के साथ
अख़लाक़ अहमद आहन
शेर
ज़रा आहिस्ता ले चल कारवान-ए-कैफ़-ओ-मस्ती को
कि सत्ह-ए-ज़ेहन-ए-आलम सख़्त ना-हमवार है साक़ी
जोश मलीहाबादी
ग़ज़ल
जरस है कारवान-ए-अहल-ए-आलम में फ़ुग़ाँ मेरी
जगा देती है दुनिया को सदा-ए-अल-अमाँ मेरी
सीमाब अकबराबादी
ग़ज़ल
बाग़ तक क्या कारवान-ए-हुस्न-ए-बे-परवा गया
बू परेशाँ है रुख़-ए-गुल को पसीना आ गया
अब्दुल अज़ीज़ फ़ितरत
नज़्म
इंक़िलाब
वो कारवान-ए-गुल-ए-ताज़ा जिस के मुज़्दे से
दिमाग़-ए-इश्क़ मोअत्तर है और फ़ज़ा मामूर
ख़ुर्शीदुल इस्लाम
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kaarvaan-e-hastii
कारवान-ए-हस्ती کَارْوَانِ ہَسْتی
caravan of life
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नज़्म
बाक़ीस्त शब-ए-फ़ित्ना
अँधेरे में चला है कारवान-ए-बे-जरस कोई
बुलंद-ओ-पस्त कोई है न उस का पेश-ओ-पस कोई
अज़ीज़ क़ैसी
ग़ज़ल
है सफ़र में कारवान-बहर-ओ-बर किस के लिए
हो रहा है एहतिमाम-ए-ख़ुश्क-ओ-तर किस के लिए
मोहम्मद ख़ालिद
ग़ज़ल
क्या कारवान-ए-हस्ती गुज़रा रवा-रवी में
फ़र्दा को मैं ने देखा गर्द-ओ-ग़ुबार-ए-दी में
नज़्म तबातबाई
नज़्म
कारवान-ए-हयात
मैं देखता हूँ कि इंसाँ का कारवान-ए-हयात
उजाला छोड़ चला है सियाही की जानिब
अमजद नजमी
ग़ज़ल
दिल-फ़िगारो कारवान-ए-जाँ-निसाराँ जाएगा
इस तरफ़ से इक गिरोह-ए-ग़म-गुसाराँ जाएगा
अब्दुर रहमान जामी
ग़ज़ल
छुपा के सो गई मुँह दिन में रहगुज़ार-ए-फ़िराक़
जो शब हुई तो ख़यालों का कारवाँ गुज़रा
सय्यदा शान-ए-मेराज
नज़्म
सुब्ह-ए-शब-ए-इंतिज़ार
निगाह को थी मगर मीर-ए-कारवाँ की तलाश
नज़र जो उट्ठी तो देखा कि एक मर्द-ए-फ़क़ीर


