आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "kharaa"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "kharaa"
ग़ज़ल
अल्लामा इक़बाल
अन्य परिणाम "kharaa"
ग़ज़ल
यही शैख़-ए-हरम है जो चुरा कर बेच खाता है
गलीम-ए-बूज़र ओ दलक़-ए-उवेस ओ चादर-ए-ज़हरा
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
तसलसुल
कब से सुनसान ख़राबों में पड़ा था ये जहाँ
कब से ख़्वाबीदा थे इस वादी-ए-ख़ारा के सनम









