आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "khilnaa"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "khilnaa"
नज़्म
फ़रार
वो कँवल जिन को कभी उन के लिए खिलना था
उन की नज़रों से बहुत दूर भी खिल सकते हैं
साहिर लुधियानवी
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
अन्य परिणाम "khilnaa"
ग़ज़ल
गुल-ए-रंगीं ये कहता है कि खिलना हुस्न खोना है
मगर ग़ुंचा समझता है निखरता जा रहा हूँ मैं
नुशूर वाहिदी
ग़ज़ल
दिल-ए-मुज़्तर के बाइस रोज़-ओ-शब रहते हैं बस लर्ज़ां
दर-ओ-दीवार-ए-ख़ाना तिलमिलाना इस को कहते हैं
जुरअत क़लंदर बख़्श
ग़ज़ल
गुल-ए-पज़मुर्दा से ग़ुंचे को हमदर्दी नहीं मुमकिन
अभी तो इस को खिलना है अभी इस को सँवरना है
अकबर इलाहाबादी
नज़्म
संगम
प्रयाग पे बिछड़ी हुई बहनें जो मिली हैं
पानी की ज़मीं पर भी तो कलियाँ सी खिली हैं
हामिदुल्लाह अफ़सर
ग़ज़ल
नज़र आता नहीं शबनम का गिरना फूल का खिलना
मोहब्बत की हक़ीक़त ना-गहाँ मा'लूम होती है





