आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "khor"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "khor"
पृष्ठ के संबंधित परिणाम "khor"
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
अन्य परिणाम "khor"
ग़ज़ल
ब्याज में खेत न ज़ेवर न वो धन चाहता है
सूद-ख़ोर आज तो बेवा का बदन चाहता है
राजीव रियाज़ प्रतापगढ़ी
शेर
सभी ज़िंदगी पे फ़रेफ़्ता कोई मौत पर नहीं शेफ़्ता
सभी सूद-ख़ोर तो हो गए हैं कोई पठान नहीं रहा
शुजा ख़ावर
ग़ज़ल
बहुत से पेड़ आदम-ख़ोर-ख़सलत वाले होते हैं
'नवाज़' हर पेड़ के साये में सुस्ताया नहीं जाता
नवाज़ असीमी
नज़्म
गुरेज़
ये जा कर कोई बज़्म-ए-ख़ूबाँ में कह दो
कि अब दर-ख़ोर-ए-बज़्म-ए-ख़ूबाँ नहीं मैं
असरार-उल-हक़ मजाज़
हास्य
सुनिए इक साहब का क़िस्सा जो बड़े फ़नकार हैं
हाँ मगर थोड़े से दावत-ख़ोर ओ दुनिया-दार हैं
दिलावर फ़िगार
ग़ज़ल
सभी ज़िंदगी पे फ़रेफ़्ता कोई मौत पर नहीं शेफ़्ता
सभी सूद-ख़ोर तो हो गए हैं कोई पठान नहीं रहा
शुजा ख़ावर
ग़ज़ल
ग़रज़-दारी की ख़ार-आवर मोहब्बत-ख़ोर बेलें हैं
तिरे पैकर से पैवस्ता हमारे सामने मत आ
हमीदा शाहीन
नज़्म
रोज़ा-ख़ोर से इंटरव्यू
मैं ने इंटरव्यू किया कल एक रोज़ा-ख़ोर से
मैं ज़बाँ से बोलता था वो शिकम के ज़ोर से


