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ग़ज़ल
'ख़ुसरव' थे उस के हल्क़ा-बगोशों में आप भी
हाथों में डाले हाथ अभी कल की बात है
फ़िरोज़ नातिक़ ख़ुसरो
बच्चों की कहानी
शकीलुर्रहमान
ग़ज़ल
'ख़ुसरव' सफ़ीर-ए-वक़्त से ग़म का मिज़ाज पूछ
माज़ी की अज़्मतों का ख़ुशी का पता न माँग
अमीर अहमद ख़ुसरव
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रेख़्ता शब्दकोश
KHushuu'
ख़ुशू' خُشُوع
नम्रता, विनय, आजिज़ी, किसी के सामने भय और विस्मय के साथ खड़े रहना, विनम्र होना, गिड़गिड़ाना (आमतौर पर ख़ुज़ू' (विनम्रता) के साथ)
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ग़ज़ल
ख़लिश से जिस की थी वाबस्ता याद मंज़िल की
वो ख़ार पाँव से 'ख़ुसरव' निकल गया कैसे
अमीर अहमद ख़ुसरव
नज़्म
तमाशा-गह-ए-लाला-ज़ार
वो नौ-शेरवाँ और ज़र-दुश्त और दारियूश
वो फ़रहाद शीरीं वो कै-ख़ुसरो ओ कै-क़बाद
नून मीम राशिद
ग़ज़ल
जाने ये शौक़ की है कौन सी मंज़िल 'ख़ुसरव'
मैं कहीं रहता हूँ दिल मेरा कहीं रहता है
अमीर अहमद ख़ुसरव
ग़ज़ल
न बाँध रख़्त-ए-सफ़र पहले सोच ले 'ख़ुसरव'
शिकस्ता नाव अँधेरी है रात दरिया है




