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ग़ज़ल
ये किस ने खींच दी साँसों की लक्ष्मण-रेखा
कि जिस्म जलता है बाहर जो पाँव धरते हैं
कृष्ण बिहारी नूर
ग़ज़ल
अपाहिज बाप को बेटा अकेला छोड़ जाता है
मुसीबत में तो अक्सर साथ साया छोड़ जाता है
लक्ष्मण शर्मा वाहिद
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रेख़्ता शब्दकोश
daaman
दामन دامَن
कुर्ते या क़बा इत्यादि का गिरेबान से नीचे का भाग, कुर्ते, अंगरखे या क़बा इत्यादि (अर्थात वह पहनावा जो पहना जाए) का नीचे का भाग, चोली से नीचे का घेरदार भाग
balmaa.n
बल्माँ بَلْماں
رک : بَلَم.
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कहानी
राजिंदर सिंह बेदी
ग़ज़ल
अगर बाली के जैसा वो निकल जाए तो ला'नत है
मगर लक्ष्मण के जैसा जिस का भाई हो बधाई हो
ऋतुराज कुमार
ग़ज़ल
न दुनिया मुख़्तसर है ये न ही लक्ष्मण की रेखा है
ज़मीं से आसमाँ तक मैं उड़ानें कम नहीं रखती
अल्का शरर
नज़्म
गुरेज़
मुंतज़िर जिन का नहीं कोई भी दशरथ अफ़सोस
साथ लक्ष्मण भी नहीं क़ुर्बत-ए-सीता भी नहीं
अब्दुल हामिद देहलवी
नज़्म
मुफ़्लिसी
तअ'ज़ीम जिस की करते हैं तो अब और ख़ाँ
मुफ़्लिस हुए तो हज़रत-ए-लुक़्माँ किया है याँ
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
हिण्डोला
अदा अदा में कोई शान-ए-इन्फ़िरादी थी
ग़रज़ कुछ और ही लक्षण थे मेरे बचपन के
फ़िराक़ गोरखपुरी
नज़्म
रात सुनसान है
लक्ष्मी-देवी तो मिरी बात नहीं सुन सकतीं
मुझ को मालूम है क्या बीत चुकी है तुझ पर
मुस्तफ़ा ज़ैदी
ग़ज़ल
मूसा की है क़सम तुझे और कोह-ए-तूर की
नूर-ओ-फ़रोग़-ए-जल्वा-ए-लमआ'न की क़सम
इंशा अल्लाह ख़ान इंशा
नज़्म
बरसो राम धड़ाके से
उस के घर को देख के लक्ष्मी मुड़ जाती थी नाके से
बरसो राम धड़ाके से





