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नज़्म
नौ-जवान से
न देख ज़ोहद की तू इस्मत-ए-गुनह-आलूद
गुनह में फ़ितरत-ए-इस्मत-मआब पैदा कर
असरार-उल-हक़ मजाज़
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नज़्म
हुज़ूर-ए-रिसालत मआ'ब में
گراں جو مجھ پہ يہ ہنگامہ زمانہ ہوا
جہاں سے باندھ کے رخت سفر روانہ ہوا
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
नोशी गिलानी
ग़ज़ल
जो आवे मुँह पे तिरे माहताब है क्या चीज़
ग़रज़ ये माह तो क्या आफ़्ताब है क्या चीज़
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
पस-ए-आईना
मैं जानता हूँ कि ख़ुर्शीद है जलाल-मआब
मगर ग़ुरूब से ख़ुद को रिहाई देता नहीं
अहमद नदीम क़ासमी
नज़्म
नक़्क़ाद
तेरी रातों की सियाही में भी ऐ ज़ुल्मत-मआब
क्या कभी ताले हुआ है मुस्कुरा कर आफ़्ताब
जोश मलीहाबादी
नज़्म
वज़ीर का ख़्वाब
मुझ से इज़्ज़त-दार डरते हैं मैं हूँ इज़्ज़त-मआब
''ईं कि मी बीनम ब बेदारीसत यारब या ब ख़्वाब''
सय्यद मोहम्मद जाफ़री
नज़्म
उर्दू
काश उर्दू ही में हो सारे दफ़ातिर का हिसाब
काश तक़रीरें करें उर्दू में सब इज़्ज़त-मआब










