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कहानी
ईशर सिंह जूंही होटल के कमरे में दाख़िल हुआ, कुलवंत कौर पलंग पर से उठी। अपनी तेज़ तेज़ आँखों ...
सआदत हसन मंटो
उद्धरण
लीडर जब आँसू बहा कर लोगों से कहते हैं कि मज़हब ख़तरे में है तो इसमें कोई हक़ीक़त नहीं होती। म...
सआदत हसन मंटो
कहानी
बटवारे के दो-तीन साल बाद पाकिस्तान और हिंदोस्तान की हुकूमतों को ख़्याल आया कि अख़लाक़ी क़ैदिय...
सआदत हसन मंटो
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विशेष
विशेष अंश
सआदत हसन मन्टो
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कहानी
बरसात के यही दिन थे। खिड़की के बाहर पीपल के पत्ते इसी तरह नहा रहे थे। सागवान के इस स्प्रिंग...
सआदत हसन मंटो
उद्धरण
आप शहर में ख़ूबसूरत और नफ़ीस गाड़ियाँ देखते हैं... ये ख़ूबसूरत और नफ़ीस गाड़ियाँ कूड़ा करकट उ...
सआदत हसन मंटो
उद्धरण
मैं बग़ावत चाहता हूँ। हर उस फ़र्द के ख़िलाफ़ बग़ावत चाहता हूँ जो हमसे मेहनत कराता है मगर उसके द...
सआदत हसन मंटो
उद्धरण
पहले मज़हब सीनों में होता था आजकल टोपियों में होता है। सियासत भी अब टोपियों में चली आई है। ...
सआदत हसन मंटो
कहानी
उसके सारे जिस्म में मुझे उसकी आँखें बहुत पसंद थीं। ये आँखें बिल्कुल ऐसी ही थीं जैसे अंधेरी...
सआदत हसन मंटो
उद्धरण
ज़माने के जिस दौर से हम इस वक़्त गुज़र रहे हैं अगर आप इससे नावाक़िफ़ हैं तो मेरे अफ़साने पढ़िये।...
सआदत हसन मंटो
कहानी
ये 1919 ई. की बात है भाई जान, जब रूल्ट ऐक्ट के ख़िलाफ़ सारे पंजाब में एजिटेशन हो रही थी। मैं...
सआदत हसन मंटो
तंज़-ओ-मज़ाह
मिर्ज़ा ग़ालिब अपने दोस्त हातिम अली मेहर के नाम एक ख़त में लिखते हैं, “मुग़ल बच्चे भी अजीब हो...




