aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "manto"
ज़हीन इतनी है उस से बहस तो हम कर नहीं सकतेमुझे मंटो के अफ़्साने बिला-नाग़ा सुनाती है
इतने नेक हैं सारे तोमंटो के अफ़्साने फिर
सआदत हसन मंटो
1912 - 1955
लेखक
आबिद हसन मन्टो
तसनीम मिंटो
बिलाल हसन मिंटो
सय्यद क़मर मंटो
शायर
मन्टो मेमोरीयल, कराची, लाहौर
पर्काशक
डी. मिंटो रोड, नई दिल्ली
ईशर सिंह जूंही होटल के कमरे में दाख़िल हुआ, कुलवंत कौर पलंग पर से उठी। अपनी तेज़ तेज़ आँखों से उसकी तरफ़ घूर के देखा और दरवाज़े की चटख़्नी बंद कर दी। रात के बारह बज चुके थे, शहर का मुज़ाफ़ात एक अजीब पुर-असरार ख़ामोशी में ग़र्क़ था। कुलवंत कौर...
लीडर जब आँसू बहा कर लोगों से कहते हैं कि मज़हब ख़तरे में है तो इसमें कोई हक़ीक़त नहीं होती। मज़हब ऐसी चीज़ ही नहीं कि ख़तरे में पड़ सके, अगर किसी बात का ख़तरा है तो वो लीडरों का है जो अपना उल्लू सीधा करने के लिए मज़हब को...
बटवारे के दो-तीन साल बाद पाकिस्तान और हिंदोस्तान की हुकूमतों को ख़्याल आया कि अख़लाक़ी क़ैदियों की तरह पागलों का तबादला भी होना चाहिए यानी जो मुसलमान पागल, हिंदोस्तान के पागलख़ानों में हैं उन्हें पाकिस्तान पहुंचा दिया जाये और जो हिंदू और सिख, पाकिस्तान के पागलख़ानों में हैं उन्हें हिंदोस्तान...
अमृतसर से स्शपेशल ट्रेन दोपहर दो बजे को चली और आठ घंटों के बाद मुग़लपुरा पहुंची। रास्ते में कई आदमी मारे गए। मुतअद्दिद ज़ख़्मी हुए और कुछ इधर उधर भटक गए। सुबह दस बजे कैंप की ठंडी ज़मीन पर जब सिराजुद्दीन ने आँखें खोलीं और अपने चारों तरफ़ मर्दों, औरतों...
दिल्ली आने से पहले वो अंबाला छावनी में थी जहां कई गोरे उसके गाहक थे। उन गोरों से मिलने-जुलने के बाइस वो अंग्रेज़ी के दस पंद्रह जुमले सीख गई थी, उनको वो आम गुफ़्तगु में इस्तेमाल नहीं करती थी लेकिन जब वो दिल्ली में आई और उसका कारोबार न चला...
सआदत हसन मंटो - लघु कहानी के कारण मशहूर थे। वो एक प्रसिद्ध लघु कहानी लेखक थे। उनकी श्रेष्ठ कहानियों का संग्रह रेख़्ता पर पढ़ें।
सआदत हसन मन्टो
प्रख्यात उर्दू कहानीकार l श्रेष्ठ कथाओं जैसे 'ठंडा गोश्त', 'खोल दो ', 'टोबा टेक सिंह', 'बू' आदि के रचयिताl
मानताمانتا
अपने ऊपर किसी बात का दायित्व लेना
मानोمانو
कल्पना कीजिए, जैसे- मानो हम सब एक नए ग्रह पर जाकर बस जाएँ
मनताمَنتا
मनाना, सन्देह दूर करना, विश्वास दिलाना
मनोمَنو
منوسمرتی کا بنانے والا، ہندؤوں میں ایک بہت بڑے فاضل کا نام، جس نے دھرم شاستر بنایا، جو منو کا دھرم شاستر کہلاتا ہے
धुआँ
अफ़साना
Manto Nama
Fasane Manto Ke
ख़ालिद अशरफ़
अफ़साना तन्क़ीद
Manto Ke Fahesh Afsane
Saadat Hasan Manto
फ़र्ज़ाना असलम
Aatish Pare Aur Siyah Hashiye
फ़िक्शन
मन्टो का उसलूब
ताहिरा इक़बाल
आलोचना
मंटो का सरमाया-ए-फ़िक्र-ओ-फ़न
निगार अज़ीम
Manto aur Ismat ke Afsano Mein Aurat ka Tassavvur
परवेज़ शहरयार
Aap Ka Saadat Hasan Manto
पत्र
Kali Shalwar
मंटो: कहानियाँ
Manto: Noori Na Naari
मुमताज़ शीरीं
Manto Ke Mazameen
मज़ामीन / लेख
Phundne
प्रतिबंधित पुस्तकें
बरसात के यही दिन थे। खिड़की के बाहर पीपल के पत्ते इसी तरह नहा रहे थे। सागवान के इस स्प्रिंगदार पलंग पर जो अब खिड़की के पास से थोड़ा इधर सरका दिया गया था एक घाटन लौंडिया रणधीर के साथ चिपटी हुई थी। खिड़की के पास बाहर पीपल के नहाए...
आप शहर में ख़ूबसूरत और नफ़ीस गाड़ियाँ देखते हैं... ये ख़ूबसूरत और नफ़ीस गाड़ियाँ कूड़ा करकट उठाने के काम नहीं आ सकतीं। गंदगी और ग़लाज़त उठा कर बाहर फेंकने के लिए और गाड़ियाँ मौजूद हैं जिन्हें आप कम देखते हैं और अगर देखते हैं तो फ़ौरन अपनी नाक पर रूमाल...
मैं बग़ावत चाहता हूँ। हर उस फ़र्द के ख़िलाफ़ बग़ावत चाहता हूँ जो हमसे मेहनत कराता है मगर उसके दाम अदा नहीं करता।...
पहले मज़हब सीनों में होता था आजकल टोपियों में होता है। सियासत भी अब टोपियों में चली आई है। ज़िंदाबाद टोपियाँ।...
दुनिया में जितनी लानतें हैं, भूक उनकी माँ है।...
उसके सारे जिस्म में मुझे उसकी आँखें बहुत पसंद थीं। ये आँखें बिल्कुल ऐसी ही थीं जैसे अंधेरी रात में मोटर कार की हेडलाइट्स जिनको आदमी सब से पहले देखता है। आप ये न समझिएगा कि वो बहुत ख़ूबसूरत आँखें थीं, हरगिज़ नहीं। मैं ख़ूबसूरती और बदसूरती में तमीज़ कर...
दिल ऐसी शैय नहीं जो बाँटी जा सके।...
ज़माने के जिस दौर से हम इस वक़्त गुज़र रहे हैं अगर आप इससे नावाक़िफ़ हैं तो मेरे अफ़साने पढ़िये। अगर आप इन अफ़्सानों को बर्दाश्त नहीं कर सकते तो इस का मतलब है कि ये ज़माना नाक़ाबिल-ए-बर्दाश्त है... मुझ में जो बुराईयाँ हैं, वो इस अह्द की बुराईयां हैं......
ये 1919 ई. की बात है भाई जान, जब रूल्ट ऐक्ट के ख़िलाफ़ सारे पंजाब में एजिटेशन हो रही थी। मैं अमृतसर की बात कर रहा हूँ। सर माईकल ओडवायर ने डिफ़ेंस आफ़ इंडिया रूल्ज़ के मातहत गांधी जी का दाख़िला पंजाब में बंद कर दिया था। वो इधर आ...
मिर्ज़ा ग़ालिब अपने दोस्त हातिम अली मेहर के नाम एक ख़त में लिखते हैं, “मुग़ल बच्चे भी अजीब होते हैं कि जिस पर मरते हैं उसको मार रखते हैं, मैंने भी अपनी जवानी में एक सितम पेशा डोमनी को मार रखा था।”...
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